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इंदौर में पर्यावरण की संस्था और प्रदूषण नियंत्रण की बात होती है, तब शीर्ष पर बैठे लोगों की नजरें टेम्पो की ओर जाती हैं। टेम्पो यानी प्रदूषण। प्रदूषण रोकना हो तो टेम्पो बंद करा दो, यह मोटी धारणा है। टेम्पो बंद करा देना शायद आसान हो, उसे वाहवाही भी मिल जाए, लेकिन प्रदूषण का अर्थ हम केवल दुआं, धूल और शोर को ही मानते हैं, जबकि यह तो प्रदूषण का छोटा-सा हिस्सा है। दरअसल धुआं, धूल और शोर हमारी शांति को भंग कर मन को विचलित कर देते हैं, जो हमारी सेहत के लिए खतरनाक है, लेकिन यहां एक और प्रदूषण बहुत ज्यादा है और दुर्भाग्यरश उसकी ओर किसी का भी ध्यान नहीं है- वह है विजुअल नॉइस यानी दृश्य शोर या दृश्य ध्वनि।

शोर कानों के जरिए हमारी शांति को भंग करता है और दृश्य शोर या विजुअल नॉइस हमारी आंखों के जरिए। इंदौैर में आप किसी भी सड़क पर जाइए, अनावश्यक हॉर्न और प्रेशर हॉर्न देते वाहन सामने, आजू-बाजू और पीछे से आते रहते हैं। यों ता हॉर्न देना ही दूसरे वाहन चालक की बेइज्जती करना होता है, जिसका निहितार्थ होता है- अबे, अलग हट, मैं आ रहा हूं। किसी भी सभ्य शहर में हॉर्न आखिरी शस्त्र होता है और उसका उपयोग ब्रह्मास्त्र की ही तरह किया जाना चाहिए।

इंदौर में इस बात को छोड़ दें, (यह तो होता ही है!) वाहन जिस क्रम, गति और झटके से आपके पास से गुजरते हैं, वह है विजुअल शोर। आपकी तंद्रा जितनी हॉर्न से भंग होती है, उससे ज्यादा इस कृत्य से होती है। आप पार्विंâग के लिए जाते हैं, तो पाते हैं कि वाहन बेतरतीब पड़े हैं और जब अपना काम खत्म होने के बाद आप वाहन निकालने जाते हैं, तब पाते हैं कि बेतरतीब पार्विंâग के कारण आप खुद भी पंâसे हुए हैं। जब आप शांतिपूर्वक वाहन चलाते हुए चौराहे पर जाते हैं और ट्रैफिक सिग्नल बंद पड़े होते हैं, तब वे सिग्नह एक तरह से विजुअल नॉइस करते हैं। उससे आपकी शांति में खलल पड़ता है।

ऐसे ही किसी इमारत की बंद पड़ी लिफ्ट शोर नहीं करती लेकिन विजुअल नॉइस करती है। वह बिना कुछ कहे आपको संदेश देती है, चिढ़ाती है कि पैदल चढ़ो। जब जनता की समस्याओं के बारे में अखबारों में पन्ने रंगे जाते हैं और नेता भाषण देते हैं तो वे शोर करते हैं, लेकिन जब प्रशासन जानबूझकर उन समस्याओं पर चुप्पी चढ़ाए रहता है तब वह चुप्पी विजुअल नॉइस पैदा करती है, जिसका आशय है- हमें तुम्हारी कोई परवाह नहीं। तुम्हें जो करना हो वह करो। यह विजुअल नॉइस अखबारों और नेताओं के शोर से ज्यादा खतरनाक है।

आप किसी आवश्यक कार्यवश किसी दफ्तर में जाएं और वहां सबसे पहले आपके साबका तम्बावूâ चबाते लापरवाह- से चपराती से होता है और वह आपको संबंधित अधिकारी से मिलने से रोकता है तो वह आपको विजुअल नॉइस करता लगता है। उससे आपकी शांति भंग होती है। आप किसी दफ्तर में सर्वोच्च पद पर हैं और आप घुग्घू जैसे दफ्तर में प्रवेश करते हैं, कोई आपको अभिवादन नहीं करता तो दफ्तर के कर्मचारी आपके लिए विजुअल नॉइस करते हैं, जिसका अर्थ है आप जो होंगे सो होंगे। और अगर आप किसी के अभिवादन का जवाब नहीं देते तो आप प्रदूषण पैâला रहे हैं, विजुअल नॉइस कर रहे हैं, जिसका अर्थ है- तुम कहां लगते हो? मैं तो तुम जैसों को देखने लायक भी नहीं समझता! बिना नॉइस या विजुअह नॉइस के अभिवादन का श्रेष्ठत तरीका है बिना कुछ कहे हलकी-सी मुस्कान का आदान-प्रदान!

इसलिए हे इंदौरवासियों, अगर आप सचमुच प्रदूषण से मुक्ति चाहते हैं तो इस विजुअल नॉइस से और इसके पैदा करने वालों से भी बचिए! आमीन!

-प्रकाश हिन्दुस्तानी

१८ जुलाई १९९७

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