ख़ास बातें पूर्व उपराष्ट्रपति की

1 ये फ्रिंज एलिमेंट नहीं है. ये पार्टी की आइडियोलॉजी है. ये आज से नहीं कई सालों से चल रही है. 2009 का जो इलेक्‍शन मेनिफेस्टो है वो पढ़ लीजिए, 2014 मेनिफेस्टो को पढ़ लीजिए उसमें भी यहीं बाते हैं. एक संविधान है वो हमारा धर्म है. इसके आगे जो धर्म को मानते हैं वो प्राइवेट बात है. सरकारी धर्म हमारा संविधान है. ये एक्सीडेंटल बात नहीं है उस पार्टी ने ये आइडियोलॉजी बनाई हुई है और उसका ये ही नतीजा है. जिसने जो कहा वो अनपढ़ नहीं है." अंसारी ने कहा, "ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए थी. इस तरह से धार्मिक मामले में गालीगलौज पर उतर आना गलत है,अगर हुआ है ठीक करने में समय लगेगा और इसके तरीके हैं."

2. इंडोनेशिया के बाद हमारे देश का तीसरा नंबर है. हमारे लिए इस्लाम कोई अजूबा नहीं है ये धर्म यहां हजारों सालों से है. हम मिलजुल कर रहे हैं, अचानक जो हुआ है ये क्यों हुआ? क्योंकि किसी एक पार्टी की तरफ से और आइडियोलॉजी की तरफ से ये कहा जा रहा है कि इस्लाम खराब है, इसे मानने वाले भारतीय नहीं है तो सब बातें गलत हैं. हम नागरिक हैं हम आपस में भाई हैं. ऐसा तो किसी दुश्मन के साथ भी नहीं करते.

3. खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया जेनिइन थी और होनी भी चाहिए. बात केवल खाड़ी देशों की नहीं है. बात इंडोनेशिया से शुरू होती है और नार्थ अफ्रीका तक जाती है. ऐसी बात कही गई कि हर वह आदमी जो एक धर्म को फॉलो करता है उसे इससे ठेस पहुंची है."

4. आप हमको नागरिक मानते हैं या नहीं मानते? क्या मुसलमानों को बराबरी की फेसेलिटीज मिल रही हैं?

5. हमारी आबादी 14. 5 परसेंट है 20 करोड़ से ज्यादा है , हमर रिप्रेजेंटेशन एप्रोप्रिएट है या नहीं?

ट्रेलर देखकर ही दर्शक समझ गए कि पृथ्वीराज और धाकड़ नहीं देखना! मूर्ख नहीं है दर्शक !
क्यों फ्लॉप हुई सम्राट पृथ्वीराज, क्यों फ्लॉप हुई धाकड़
ट्रेलर नहीं दिखाते तो चल जाती सम्राट पृथ्वीराज ! ट्रेलर देखकर ही समझ गए दर्शक कि यह फिल्म नहीं देखना है, बकवास है यह फिल्म !

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जैन धर्म की पहली आचार्य पद प्राप्त करने वाली साध्वी म.सा. चंदनाजी से मिलना एक विलक्षण अनुभव रहा। साध्वी जी को हाल ही में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। 86 वर्ष की उम्र में भी वे मानव सेवा के कार्य में सतत् जुटी हैं। इंदौर प्रवास के दौरान उनसे निजी मुलाकात प्रेरणादायी रहीं। कई विषयों पर उन्होंने अपनी बेबाक राय व्यक्त की। 

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राहुल गांधी अपेक्षाकृत युवा हैं, पढ़े लिखे हैं, सक्रिय हैं, कांग्रेस के सांसद हैं; वे जो भी कहते हैं चर्चा में आ जाता है! जो करते हैं उस पर सवालों की बौछार होने लगाती है, मीम्स बनाये जाते हैं, तंज़ किये जाते हैं, लेकिन उनकी हर बात पर सरकार प्रतिक्रिया अवश्य देती है !

प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री... जो भी बात कहते हैं, कहीं न कहीं राहुल गांधी का सन्दर्भ आ ही जाता है। देश का एक बड़ा वर्ग मानता है कि राहुल गांधी बहुत नेकदिल और सरल हृदय शख्स हैं, इसीलिए वे राजनीति में मिसफिट हैं! खुद उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ लोग उन्हें नेता कहते हैं, लेकिन उनके निर्देश नहीं मानते।

क्या राहुल गांधी निरे आदर्शवादी हैं या वर्तमान दौर की राजनीति के उपयुक्त नहीं हैं? क्या वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पासंग नहीं बैठते? क्या अमरिंदर, ज्योतिरादित्य और हार्दिक पटेल आदि की तरह पूरी कांग्रेस राजनीति के अवसाद में है ?

मध्यप्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनाव की तैयारियां की जा रही हैं। अध्यक्ष और महापौर के चुनाव अप्रत्यक्ष कराए जाने पर कमलनाथ सरकार की नीति को ही वर्तमान शिवराज सिंह सरकार बरकरार रखा हैं। इसकी क्या वजहें हैं? क्या असर पड़ेगा इसका चुनाव पर? क्या अप्रत्यक्ष रूप से चुना गया महापौर और अध्यक्ष उतना शक्ति संपन्न नहीं होगा? द सूत्र के एडिटर इन चीफ आनंद पाण्डे और मीडिया में विभिन्न पदों पर रहें कमलेश पारे से विमर्श।

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