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पिछले दिनों ट्विटर के शेयर के दाम विश्व मार्केट में एकाएक ऊपर चले गए। कई लोगों को यह बात समझ में नहीं आई कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि ट्विटर के शेयर अचानक नई ऊंचाई पर पहुंच गए। एक दिन में 6.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो शेयर बाजार में आमतौर पर देखने को नहीं मिलती। आखिर ऐसा क्यों हुआ, जब इसकी पड़ताल की गई, तब पता चला कि मास्टर कार्ड नए पेमेंट गेटवे के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेने की दिशा में कार्य कर रहा है। मास्टर कार्ड के प्रेसिडेंट ऐन कायरंस ने बताया कि मास्टर कार्ड के पेमेंट को सोशल मीडिया से जोड़ने के लिए हमारी बातचीत ट्विटर और उसके प्रतिस्पर्धी फेसबुक से चल रही है।

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मास्टर कार्ड के प्रेसिडेंट कोपेनहेगन में चल रही फिनटेक कांफ्रेंस मनी 2020 में भाग लेने में बाद एक न्यूज चैनल को इंटरव्यू दे रहे थे। तभी उनके मुंह से यह बात निकल गई। दरअसल मास्टर कार्ड और विजा कार्ड जैसी कंपनियां पेमेंट गेटवे को आसान और आम आदमी तक पहुंच वाला बनाने के प्रयास में लगी हैं। इन कंपनियों को लगता है कि अगर टेक्नोलॉजी और फायनेंस के क्षेत्र में परस्पर सामंजस्य बढ़ें, तो अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में क्रांति हो सकती है, जिसका फायदा सभी को मिल सकता है।

दुनियाभर में फैले करोड़ों मास्टर कार्डधारी अपनी खरीददारी का भुगतान करने के लिए ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग तो कर ही सकते है, लेकिन अगर वे सोशल मीडिया के माध्यम से यह कार्य करेंगे, तो इनके लिए और भी आसानी होगी। इस तरह भुगतान प्रणाली से मास्टर कार्ड का प्रचार भी अपने आप हो जाएगा। यह आर्थिक क्षेत्र में तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल करके आम लोगों को अधिकाधिक सुविधा प्रदान करने का मामला होगा।

मास्टर कार्ड अभी तकनीक के क्षेत्र में बहुत तेजी से कार्य कर रहा है। तकनीक क्षेत्र के दो बड़े महारथियों से उसने समझौता कर रखा है, जिसके जरिये भुगतान के नए-नए तरीके आजमाए जा रहे है। अभी मास्टर कार्ड एप्पल पे और गूगल पे के माध्यम से भुगतान स्वीकार कर रहा है। फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया के प्लेटफार्म के जुड़ने से मास्टर कार्ड का बाजार और पुख्ता हो जाएगा।

अमेरिकी ग्राहकों के लिए हाल ही में एक नई सेवा शुरू की गई है, जिसके माध्यम से मैसेंजर का उपयोग करके मास्टर कार्ड के डेबिट कार्ड का भुगतान किया जा सकता है। ट्विटर ही बाजार में अपना कारोबार बढ़ाने के नए-नए रास्ते खोज रहा है। कुछ ब्रांड को वह ट्विटर पर विज्ञापन के दौरान ‘बाय नाउ’ विकल्प देने की व्यवस्था कर चुका है। मास्टर कार्ड इस व्यवस्था में उसका ऑफिशियल पार्टनर है।

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मास्टर कार्ड के माध्यम से होने वाली कथित धोखाधड़ी को रोकने के लिए ‘सेल्फी पे’ सिस्टम पर कार्य किया जा रहा है। इस तकनीक में क्रेडिट कार्ड कंपनी बॉयोमेट्रिक प्रणाली से चेहरे और हाथ की अंगुलियों को स्केन करके शॉपिंग को सुरक्षित बना सकती है और क्रेडिट और डेबिट कार्ड के माध्यम से होने वाली कथित धोखाधड़ी को रोक सकती है।

अभी मास्टर कार्ड अपने कार्ड धारकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए एक पासवर्ड रजिस्टर करने को कहती है। यह पासवर्ड सही-सही एंटर करने के बाद ही खरीदारी संभव हो सकती है। अब पासवर्ड की जगह सेल्फी को स्केन करके या फिंगर प्रिंट्स का उपयोग करके पेमेंट को सुरक्षित करने की व्यवस्था की जा रही है। इसमें कार्डधारक को ऑनलाइन पर्चेसिंग के लिए सामान्य जानकारी देने को कहेगी और साथ ही कहेगी कि वे अपने स्मार्टफोन से अपनी पहचान की पुष्टि फिंगर प्रिंट या फोन के कैमरे के माध्यम से फोटो या वीडियो के जरिये करें। सेल्फी अपलोड करने के बाद ही खरीदारी पूरी हो पाएगी।

अभी इस बारे में एक हजार ग्राहकों के साथ प्रयोग किया जा रहा है। यूएसए और नीदरलैंड के यह कार्ड उपभोक्ता इस नई तकनीक से सुरक्षित खरीदारी कर रहे है। मास्टर कार्ड के प्रबंधकों का कहना है कि वे प्रयोग से संतुष्ट है। मोबाइल फोन के जरिये फिंगर प्रिंट्स और चेहरे का उपयोग पहचान के तौर पर करने के कुछ खतरे भी हो सकते है। पहला खतरा तो यह कि कार्डधारक की पहचान गोपनीय नहीं रहेगी। यह व्यवस्था थोड़ी जटिल भी होगी। मास्टर कार्ड के तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि फिंगर प्रिंट्स या फेस आइडेंटिटी को हम एक अपने ही गोपनीय पासवर्ड में बदल देंगे। इसलिए गोपनीयता के भंग होने की संभावनाएं न्यूनतम होगी। इन संंभावनाओं को देखिए तो लगता है कि भविष्य में ऑनलाइन शॉपिंग के लिए भी सोशल मीडिया पर उपस्थित रहना जरूरी हो जाएगा।

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