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फिल्म रिव्यू : वेलकम बैक

कबिस्तान में ‘भूतों के साथ’ अंताक्षरी किस फिल्म हैं? वेलकम बैक में आपको ऐसे दृश्य भी देखने को मिलेंगे। इस अंताक्षरी में भूतों के साथ सिनेमा हॉल के दर्शक भी अंताक्षरी खेलने लगते हैं। ठिलवाई की इंतेहा है, इस फिल्म में। इंटरवल के पहले तो यह और भी ज्यादा हैं।
वेलकम बैक को रिलीज होने के लिए बड़ा संघर्ष करना पड़ा हैं। पहले यह फिल्म दिसंबर में रिलीज होनी थी, लेकिन नहीं हो पाई। फिर मई मेंं इसकी रिलीज की डेट तय हुई, लेकिन फिर परेशानी। अब जाकर सितंबर में यह फिल्म रिलीज हुुई। अनिल कपूर इसके रिलीज से इतने डरे हुए थे कि उन्हेंं इसकी अच्छी ओपनिंग की आशा नहीं थी, लेकिन फिल्म ठीकठाक टाइम पास है, बशर्तें आप दिमाग का इस्तेमाल न करें।
वेलकम जहां खत्म हुई थी, उसके आगे से ही वेलकम बैक शुरू होती हैं। कहानी वही है और झोल इतने ज्यादा हैं कि दर्शक के दिमाग से उतर ही जाता है कि कौन क्या है। बस इतना याद रहता है कि अनिल कपूर और नाना पाटेकर ऐसे डॉन है, जो शरीफ आदमी बन गए हैं। अक्षय कुमार की जगह इसमें जॉन अब्राहम हैं। उनके अलावा परेश रावल, नसीरुद्दीन शाह, शाइना आहूूजा, डिम्पल कपाड़िया, श्रुति हासन, अंकिता श्रीवास्तव, राजपाल यादव और न जाने कितने नए-पुराने कलाकार हैं। श्रुति हासन की जगह असिन को लिया गया था, लेकिन वे डेट्स के कारण इसमें काम नहीं कर सकीं। असिन के पहले यह रोल सोनाक्षी के नाम था, लेकिन उनकी भी कुछ मजबूरियां थी। मूल रूप से इस रोल के लिए सबसे पहले कैटरीना कैफ का नाम तय था। इस तरह कैटरीना से शुरू हुआ रोल श्रुति हासन पर आकर खत्म हुआ। फिल्म में सारा लॉरेन का एक आइटम भी हैं- ‘मैं बबली हुई, तु बंटी हुआ, बंद कमरे में ट्वेंटी-ट्वेंटी हुआ’ कुल मिलाकर यह फिल्म इतनी तेजी से आगे बढ़ती हैं कि तर्क और बुद्धि की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती। जिन लोगों को वेलकम पसंद आई थी, उन्हें यह फिल्म भी पसंद आएगी।
फिल्म का सबसे दिलचस्प पहलू है, इसके डॉयलाग। बेहद चुटीले डॉयलाग बार-बार हंसने को मजबूर कर देते है। इस फिल्म के कुछ डॉयलाग इस तरह हैं-
वेलकम बैक की एक अच्छी बात यह है कि इसमें फूहड़ दो अर्थों वाले संवाद न्यूनतम हैं। हल्के-फुल्के मनोरंजन के लिए फिल्म देखी जा सकती हैं।