Bookmark and Share

baji2

संजय लीला भंसाली मगल-ए-आजम की तर्ज पर पेशवा-ए-आजम बनाने निकले थे, पर वह बन गई जोधा अकबर और देवदास का मिक्स्चर। जोधा अकबर का राजसी वैभव और हिन्दूू-मुस्लिम सामंजस्य तथा देवदास का प्रेम त्रिकोण। फिल्म पर मेहनत बहुत की गई है पर वह हर वर्ग के दर्शक को पसंद आएगी ही, यह नजर नहीं आता।

भव्य फिल्में देखने का अपना आनंद है। अब वीएफएक्स के जरिए शानदार नजारे दिखाने का चलन है। इस फिल्म में रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा ने शानदार अभिनय किया है, लेकिन प्रियंका को उसकी क्रेडिट नहीं मिलने वाली। क्योंकि कहानी बाजीराव मस्तानी पर है और बाजीराव है रणवीर और दीपिका है मस्तानी।

baji1

बाजीराव और मस्तानी की प्रेम कहानी को केन्द्र में रखकर फिल्म लिखी गई है। बाजीराव पेशवा है और मस्तानी राजपूत राजा की मुस्लिम पत्नी की संतान। फिल्म में प्रेम त्रिकोण को दिखाया गया है और इसी बहाने प्रेम में धर्म के हस्तक्षेप, रजवाड़ों में होने वाले आपसी संघर्ष, उनकी रंगरेलियां और तथाकथित प्रेम की कहानी को चित्रित किया गया है। फिल्मकार चाहता तो उस दौर में होने वाले शोषण और अत्याचार को भी दिखा सकता था, लेकिन उसने यह कोशिश नहीं की। ब्राह्मणों की जातपात को उन्होंने दिखाने की कोशिश जरूर की है।

फिल्म में सभी का अभिनय अच्छा है। रणवीर सिंह ने गजब की चपलता दिखाई है। दीपिका ने पूर्व मिस वर्ल्ड प्रियंका चोपड़ा के ग्लैमर को पीछे धकेल दिया है और अभिनय में फिर बाजी मार ली है। दीपिका की भूमिका एक्शन प्रधान थी और प्रियंका की भाव प्रधान। बुंदेलखंड के राजा की लड़की दीपिका को बाजीराव पेशवा अपनी कटार भेंट करते है और मानो दीपिका उस कटार से ही ब्याह कर लेती है। अविश्वसनीय प्रेम-प्रसंग इस फिल्म में है और कहा गया है कि बुंदेलखंड की लड़की का ब्याह कटार से होने की परंपरा है।

फिल्म में मुगल-ए-आजम के तर्ज पर कुछ डॉयलॉग भी है। जैसे राजपूत अपने घाव किसी को नहीं दिखाते। आपको हमने खुदा समझा पर आप तो इंसान भी नहीं निकले। बाजीराव के संवाद आपने हमारी जान बचाई के जवाब में मस्तानी कहती है आपने हमारा मुल्क बचाया। चीते की चाल, बाज की नजर और बाजीराव की तलवार की गति कोई नहीं भांप सकता। जो इंसान के बस में नहीं वह इश्क के असर में है। अधूरी मुलाकात फिर से मिलने का बड़ा बहाना होता है। इश्क इबादत है और इबादत करने के लिए किसी की इजाजत नहीं चाहिए। यह मेरी इच्छा है कि मैं किसकी तलवार पर सिर रखूं।

baji3

बाजीराव मस्तानी मुगलकालीन इतिहास में मराठों के उदय और शौर्य पर आधारित फिल्म है। संजय लीला भंसाली ने प्रेम के रंगों पर भी इसमें संवाद डाले है और सामाजिक एकता के साथ-साथ पेशवाओं की मराठी संस्कृति को भी पर्दे पर उतारा है। बाजीराव की मां के रूप में तन्वी आजमी ने विधवा राजमाता का रोल अच्छी तरह निभाया है। मिलिंद सोमण, महेश मांजरेकर, आदित्य पंचोली, अनुजा गोखले और संजय मिश्रा के भी इस फिल्म में छोटे-मोटे रोल है।

फिल्म के गाने काफी लोकप्रिय हो चुके है। इन गानों को मराठी अंदाज में पेश किया गया है। अलबेला साजन गाना हम दिल दे चुुके सनम की याद दिला देता है। संजय लीला भंसाली ने एक और एहसान किया है कि इस फिल्म को बहुत ज्यादा खिंचने की कोशिश नहीं की। ऐतिहासिक घटनाक्रम पर आधारित कहानी को किस्से के तौर पर दिलचस्प तरीके से पेश करने की कोशिश की गई है, लेकिन अंत में फिल्म थोड़ी खींची हुई लगती है।

Search

मेरा ब्लॉग

blogerright

मेरी किताबें

  Cover

 buy-now-button-2

buy-now-button-1

 

मेरी पुरानी वेबसाईट

मेरा पता

Prakash Hindustani

FH-159, Scheme No. 54

Vijay Nagar, Indore 452 010 (M.P.) India

Mobile : + 91 9893051400

E:mail : prakashhindustani@gmail.com