Bookmark and Share

airlift

26 जनवरी के पहले अक्षय कुमार की एयरलिफ्ट में सभी कुछ मसाला है। देशभक्ति तो है ही, परिवार, एक्शन, इमोशन, ट्विस्ट, टर्न और बाकी तमाशे भी है। पूरी फिल्म में केवल अक्षय कुमार और अक्षय कुमार ही है। हीरोइन का कोई काम था नहीं, फिर भी अक्षय कुमार की पत्नी के रूप में निमृत कौर है और बाकी भी अतिरिक्त कलाकार है ही।

airlift1

फिल्म को प्रचारित ही इस तरह किया जा रहा है, मानो एयरलिफ्ट न देखना बड़ी भारी भूल हो। फिल्म मेंं एक दृश्य में जब भारतीय तिरंगा आसमान में लहराता है, तब दर्शक भी भावुक हो उठते हैं। इन दिनों जब असहिष्णुता की चर्चा हो रही है और दलित तथा गैरदलितों में विवाद की वारदातें सामने आ रही है, ऐसे में इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक बिजनेसमैन जाति, धर्म, भाषा और यहां तक कि राष्ट्रीयता को भी भुलाकर मानवता की रक्षा में जुटा है।

इस फिल्म का एक डायलॉग है, जिसमें हीरो कहता है कि इंसान की फितरत ही ऐसी होती है कि जब उसे चोट लगती है, तभी आदमी सबसे पहले मां-मां चिल्लाता है। कुवैत में जा बसे पौने दो लाख भारतीय समझते तो खुद को कुवैती ही थे, जब इराक का हमला हुआ और जान सांसत मेंं फंसी, तब उन्हें भारत माता और भारत याद आया। फिल्म का एक पात्र कहता भी है कि भारत को हमसे क्या, उसे तो दीनार चाहिए।

airlift2

पूरी फिल्म एक काल्पनिक पात्र रंजीत कत्याल को लेकर गढ़ी गई है। कुवैत में करीब एक लाख ७० हजार भारतीय रहते है। अगस्त 1990 की एक सुुबह कुवैत पर अचानक इराक का हमला हो जाता है। इराकी शासक देश छोड़कर भाग जाते है। इराकी सैनिक लूटपाट करते है और चुन-चुनकर कुवैतियों को मारना शुरू करते है। ऐसे में कुवैत में बसा एक भारतीय व्यवसायी रंजीत कत्याल अपनी कंपनी के कर्मचारियों को और फिर बाद में अन्य भारतीयों को बचाने में प्रमुख भूमिका निभाता है। फिल्म को असल जिंदगी की कहानी से जोड़ने की कोशिश की गई है। इसके लिए कल्पनाओं का सहारा लिया गया है, लेकिन यह फिल्म उतनी बड़ी गप नहीं लगती, जितनी सैफ अली खान की फैंटम लगी थी। फिल्म देखते हुए अहसास होता है कि शायद यह सच्ची घटना है।

airlift3

कहानी के अनुसार अक्षय कुमार एक अवसरवादी बिजनेसमैन है, लेकिन संकट की घड़ी में उसके मन में अपने परिवार के साथ ही अपनी कंपनी के लोगों को और फिर भारतीय लोगों को बचाने का जुनून सवार हो जाता है। वह अपनी पत्नी की आपत्तियों के बावजूद दूसरों की मदद करता है और हर तरह की तिकड़म अपनाकर भारतीय समाज के लोगों को सुरक्षित निकालने में सफल होता है।

airlift4

अगर इस फिल्म की कहानी वर्तमान दौर की होती, तो सेंसर बोर्ड उसे रोकने के लिए अड़ंगे डालता, क्योंकि इसमें दिखाया गया है कि पौने दो लाख भारतीयों को सुरक्षित निकालने में प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय की कोई रूचि नहीं रहती। बात इतने भरोसे की नहीं लगती। भारतीय दूतावासों की कामकाज पर भी तीखा व्यंग्य किया गया है। शायद यह सच नहीं है।

तकनीकी रूप से फिल्म अच्छी है। दो घंटे चार मिनिट की फिल्म में अंकित तिवारी और अमान मलिक का संगीत है। अरिजीत सिंह ने आवाज दी है। 22 मिनिट के गानों में एक दो फालतू गाने भी है। अक्षय के प्रशंसकों और देशभक्ति सप्ताह मनाने वालों को फिल्म अच्छी लगेगी। अन्य लोग भी इसे एक बार झेल सकते हैं।

22 jan 2016 Friday.

01.25 PM

Search

मेरा ब्लॉग

blogerright

मेरी किताबें

  Cover

 buy-now-button-2

buy-now-button-1

 

मेरी पुरानी वेबसाईट

मेरा पता

Prakash Hindustani

FH-159, Scheme No. 54

Vijay Nagar, Indore 452 010 (M.P.) India

Mobile : + 91 9893051400

E:mail : prakashhindustani@gmail.com