Bookmark and Share

udta-punjab-film-2

पहलाज निहलानी को शायद 'उड़ता पंजाब' में आलिया भट्ट के इस डॉयलॉग पर तकलीफ़ थी --'' मैं डिस्ट्रिक्ट लेवल पर हॉकी खेलती थी, तब लगता था कि स्टेट लेवल पर खेलूंगी तो अच्छा टाइम आयेगा, वह नहीं आया. बाप 'टें' बोल गया और बिहार से पंजाब आकर खेत में मजदूरी करने लगी तब लगता था कि अब अच्छा टाइम आयेगा। नहीं आया। फिर एक दिन हाथ में पाकिस्तान से फैंका गया कोकीन का पार्सल आया, तब लगा कि इसे बेच दूंगी तब अच्छा टाइम आयेगा, पर फंस गई इन नशे के सौदागरों में. जहां फंसी हूँ, वहां से गोवा का एक सुन्दर होर्डिंग नजर आता है, जिसकी तस्वीर देखकर अच्छा टाइम आने का इंतज़ार करती रहती हूँ.... मेरा अच्छा टाइम कभी नहीं आया!" 


आप 'अच्छा टाइम' की तुलना 'अच्छे दिन' से करने को स्वतंत्र हैं.

udta-punjab-film-1

पहलाज निहलानी ने बेकार ही 'उड़ता पंजाब' में रोड़े अटकाये। फिल्म अच्छी हैं, संवेदनशीलता लिये है और नशे के ख़िलाफ़ संदेश भी है. गालियां और हिंसा बहुत ही ज़्यादा है. पूरी फिल्म में डॉक्टर प्रीत साहनी बनी करीना कपूर खान ही हैं जो मादर...., बहन.... गां..., लव... जैसी गालियां नहीं देतीं, वरना हर पात्र डॉयलाग कम और गालियां ज्यादा देता है। यहां तक कि गानों में भी प्राइवेट बॉडी पार्ट्स के नाम भरपूर हैं। फिल्म में पुराना प्रेमी जोड़ा शाहिद कपूर और करीना कपूर खान दोनों हैं, पर किसी भी सीन में वे दोनों साथ साथ नहीं हैं. इस फिल्म की असली हीरो और हीरोइन आलिया भट्ट ही हैं, जिन्होंने ग्लैमर से दूर मज़बूर बिहारी खेत मज़दूर की भूमिका की है। डॉक्टर बनीं करीना की जोड़ी सब इंस्पेक्टर बने दिलजीत दोसांझ से है और इंटरवल के बाद शाहिद और आलिया के कुछ सीन साथ साथ के हैं। दिलजीत के छोटे भाई बल्ली के रूप में प्रभज्योत सिंह के नशे के आदि किशोरवय लड़के की शानदार भूमिका की है! नार्को-पॉलिटिक्स फ़िल्म का विषय है और दूसरी फिल्मों की तरह इसमें भी सबसे बुरा प्राणी नेता को दिखाया गया है।

udta-punjab-film-3

यह पंजाबी फिल्म है, बीच बीच में हिन्दी या अंग्रेज़ी के कुछ डॉयलाग ज़रूर हैं। ज्यादातर डॉयलॉग पंजाबी में हैं और गाने भी. सुदीप शर्मा और अभिषेक चौबे के डॉयलाग दिलचस्प हैं। जैसे फुद्दू-फुद्दू होता हैं और लल्लू-लल्लू। तेरे को दिल नहीं है, वहां कोकीन है कोकीन। जमीन बंजर और औलाद कंजर। तू वीआईपी बनना चाहता है पर पहले आदमी तो बन जा।

फिल्म में बताया गया है कि पूरे पंजाब में नेता और पुलिस भ्रष्टतम है, तीन किलो कोकीन एक करोड़ रुपए की होती है, नशेड़ी अधिकतर समय पुराने खंडरों में पाए जाते है, पंंजाब के चुनावों में शराब बांटना अब पुरानी बात हो गई, अब तो वहां कोकीन, चरस और अफीम बांटी जाती है। फिल्म में चरस का शौकीन हीरो ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है कि अपने आप को लल्लुओं का चैम्पियन कहता है और आलिया भट्ट से मिलते ही वह प्रस्ताव रखता है कि मेरे साथ सुसाइड करेगी क्या?

udta-punjab-film-5

इस फिल्म को उच्च न्यायालय के आदेश पर ही केवल एक कट के साथ रिलीज करने की अनुमति मिली है, लेकिन फिल्म के डायलॉग के अनुसार नशे के ज्यादातर सौदागर निचली अदालतों के आदेशों के विरुद्ध उच्च न्यायालय से जमानत पा जाते है। फिल्म में नशे के धंधे को सेकंड ग्रीन रिवोल्यूशन कहा गया है। पंजाब में बिहार से आए मजदूरों की स्थिति की झलक भी है। फिल्म का संगीत और पार्श्व संगीत दिलचस्प है। सिनेमेटोग्राफी अच्छी है।

udta-punjab-film-4

दर्शकों की सुविधा फिल्म में सब टाइटल अंग्रेज़ी में दिये गये हैं; उनमें गड़बड़ी भी है। एमएलए कहते वक़्त स्क्रीन पर मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट लिखा दिखाया जाना अखरता है। पूरी फिल्म में तीन कहानियां एक साथ चलती हैं, जो पंजाब में नशाखोरी से सम्बन्धित हैं। शाहिद कपूर पॉप गायक टॉमी सिंह बने हैं, जिन्हें आलिया कहती हैं कि तुम आदमी हो या कुत्ते? टॉमी सिंह? आगे जाकर उनके तार मिलते जाते हैं और फिल्म अधबीच में खत्म हो जाती है। शहीद कपूर के एक संवाद के अनुसार -- माल खत्म,पार्टी ओवर, गो होम।

Search

मेरा ब्लॉग

blogerright

मेरी किताबें

  Cover

 buy-now-button-2

buy-now-button-1

 

मेरी पुरानी वेबसाईट

मेरा पता

Prakash Hindustani

FH-159, Scheme No. 54

Vijay Nagar, Indore 452 010 (M.P.) India

Mobile : + 91 9893051400

E:mail : prakashhindustani@gmail.com