
ढिशुम फिल्म अच्छी नहीं है, तो बुरी भी नहीं है। बे सिर-पैर का मनोरंजन है। फूहड़ता नहीं है। कलाकारों की भरमार है, लेकिन फिल्म में अगर आपको स्वस्थ मनोरंजन मिल जाए, तो मानिए न्यूटन को ग्रेविटी का सिद्धांत, मोगली को कपड़े, और पीके को उसका खोया हुआ रिमोट मिल गया। इस फिल्म में पूरी कहानी जॉन अब्राहम के आसपास घूमती है। वरूण धवन इसके दूसरे प्रमुख कलाकार हैं। जैकलिन फर्नांडीस खानापूरी के लिए है और अक्षय कुमार, अक्षय खन्ना, राहुल देव, नरगिस फाखरी, परिणीति चोपड़ा, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, साबिक सलीम आदि-आदि तो है ही मोहिन्दर अमरनाथ, रमीज राजा और आकाश चोपड़ा भी अतिथि भूमिका में हैं। कभी लगता है कि आप धूम फिल्म देख रहे हैं, कभी लगता है कि ओम शांति ओम का कोई सीन फिल्म में आ गया हो।
फिल्म में एक्शन, डांस, ड्रामा, स्टंट, रोमांस, कॉमेडी, सस्पेंस, टिवस्ट, सरप्राइज, इमोशन, आइटम सांग, आइटम गर्ल, दिलचस्प लोकेशन सभी कुछ है, लेकिन कहानी जीरो है। सात साल बाद अक्षय खन्ना की कोई फिल्म देखने को मिली है। ‘गली-गली में चोर है’ में भी अक्षय खन्ना थे, पर वह फिल्म कब आई और कब गई पता ही नहीं चला। ढिशुम में वे खलनायक बने हैं।

वरुण धवन ने गोविंदा की कमी दूर कर दी है और साजिद नाडियाडवाला ने डेविड धवन की। इस फिल्म का निर्देशन रोहित धवन ने किया है। जॉन अब्राहम और अक्षय कुमार को लेकर उन्होंने देसी ब्वॉइज बनाई थी। इस बार अक्षय कुमार की भूमिका अतिथि की रखी गई है और रोहित के भाई वरुण धवन को उन्होंने प्रमुख भूमिका दी है। पूरी कहानी भारतीय क्रिकेट टीम के बेट्समैन विराज (साबिक सलीम) के अपहरण से शुरू होती है। जिसे 36 घंटे के भीतर छुड़ाने का मिशन जॉन अब्राहम को दिया जाता है। इस तरह पूरी फिल्म की कहानी 36 घंटे के दौरान घटी घटनाएं है।
124 मिनिट की फिल्म देखते वक्त आपको हर वक्त यहीं लगता है कि कहानी को जबरन खींचा जा रहा है, लेकिन किसी न किसी तरह निर्देशक ने दिलचस्पी बनाए रखी है। कई बार बेतुके घटनाक्रम सामने आते है और दर्शक सोचता है कि यह क्या हो गया। अविश्वसनीय घटनाक्रम की बाढ़ इस फिल्म में है। स्मृति ईरानी जैसी महिला मंत्री का किरदार मोना अम्बेगांवकर ने निभाया है।
नवाजुद्दीन सिद्दीकी को केवल एक सीन में खर्च कर दिया गया है। खबरी चाचा के रूप में नवाजुद्दीन खाड़ी के देशों के डोंगरी टाइप इलाके में डॉन बने है। जिनके बारे में बताया जाता है कि उन्हें दुनियाभर की खबरों की ऐसी खबर रहती है कि अगर 10 सितंबर को अमेरिका के राष्ट्रपति उनका फोन उठा लेते, तो अमेरिका में 9/11 जैसा कांड नहीं होता। जॉन अब्राहम खबरी चाचा को धमकाते हुए कहते है कि मैंने तेरे जैसे कई चाचाओं को मारकर चाचियों को बेवा किया है।
पूरी फिल्म में जॉन अब्राहम सिगरेट पीते नजर आते हैं, जिस कारण सिगरेट न पीने की चेतावनी भी पर्दे पर आती रहती है। फिल्म के अंत में क्रिकेट के बहाने राष्ट्र प्रेम का तड़का भी देने की कोशिश की है। ढिशुम देखने जाया जा सकता है, लेकिन बिना किसी अपेक्षा के।