
मजेदार फिल्म है हैप्पी भाग जाएगी। फुल टू कॉमेडी, ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं, दिलचस्प पास टाइम। यह बात और है कि हर चीज की अति कर दी गई है। ओवर एक्टिंग, ओवर कॉमेडी और कल्पना से परे घटनाक्रम। यूं भी शादी-ब्याह को लेकर बनी फिल्में चल ही जाती है। हैप्पी भी भाग जाएगी। 1993 में बनी हम हैं राही प्यार के में हीरोइन जूही चावला भी शादी के एन मौके पर भाग जाती है और फिर दिलचस्प कहानी आगे बढ़ती है।
इस फिल्म में भी शादी के मंडप से हीरोइन बाथरूम जाती है और वहीं रखे जॉगिंग शू पहनकर फूलों से लदे ट्रक में कूद जाती है, जो उसका माशूक लेकर आता है, लेकिन यहां हैप्पी जिस ट्रक में कूदती है, वह फूलों के बजाय फलों का निकलता है और पाकिस्तान जाने वाला होता है। हीरोइन भी पहुंच जाती है पाकिस्तान। जहां उसकी भेंट होती है अभय देओल से। अभय के पिताजी उसको पाकिस्तान का दूसरा कायदे-आजम जिन्ना बनाना चाहते है। फिर शुरू हो जाती है फिल्म में पाकिस्तान की राजनीति, वहां की पुलिस, भारत के लोकल नेता की मारामारी। अंत तक पहुंचते-पहुंचते हैप्पी को कई बार भागना पड़ता है, कई बार उसके प्रेमी को भागना पड़ता है और कई बार हैप्पी के मंगेतर को भी। पाकिस्तान की पुलिस तो उनके पीछे भागती ही रहती है। इस भागमभाग में दर्शक मजे लेते है और अगर दर्शक भाग जाते तो फिल्म निर्माता की हालत क्या होती, कल्पना की जा सकती है।

इस फिल्म में कॉमेडी के कई प्रसंग तैयार किए गए हैं। संवादों की अदायगी और संवादों में भी चुटीलापन है। जिम्मी शेरगिल हीरोइन का मंगेतर है, जो नेता है और कार्पोरेटर होते हुए मिनिस्टर के बराबर खर्चा शादी में कर देता है। पाकिस्तान में एक परिवार है, जो भारतीय फिल्मों से फैशन सीखता है। ‘करीना कैफ’ उस परिवार की फेवरेट है। पाकिस्तान की राजनीति कितनी खोखली है, इसका सतही वर्णन भी इस फिल्म में देखने को मिलेगा। गदर में सनी देओल पाकिस्तान जाते है और वहां से हैंडपंप उखाड़ लाते है, इस फिल्म में सनी का भाई अभय देओल पाकिस्तान का नेता पुत्र बना हैं, जो संजीदा किस्म का नेता है।

क्वीन की कंगना रनौत की तरह ही बेफिक्र इस फिल्म में डायना पेंटी ऐसी दुल्हन है, जो गलती से पाकिस्तान पहुंच जाती है, लेकिन फिर भी उसे कोई टेंशन नहीं रहता, टेंशन पाकिस्तान और पाकिस्तानियों को रहता है। आफरीदी नाम का एक पुलिस अधिकारी है, जिसे हर बार यहीं लगता है कि भारत में जो-जो हो रहा है, वह पाकिस्तान में होना चाहिए और जो हस्तियां भारत की है, उन्हें पाकिस्तान की हस्ती होना चाहिए। जैसे गांधी, सचिन, कपिल देव, युवराज सिंह आदि-आदि। उसे भारत की भूमि और भारत के नमक से बैर है, लेकिन जब उसे भारत आना होता है और पता चलता है कि पाकिस्तान को भारत से ही नमक निर्यात होता है, तब उसे अजीब लगता है। भारत की धरती पर आकर जब वह गाड़ी से उतरने की कोशिश करता है, तब उसका पैर गाड़ी से नीचे रखने में उसे भारी तकलीफ होती है।
यह फिल्म ऐसे समय पर रिलीज हुई है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। अगर यह फिल्म दोनों देशों के बीच मैत्री के माहौल में लगती, तो गजब चल पड़ती। इस फिल्म में पाकिस्तान के कलाकार अली फजल ने गुड्डू और मोमल शेख ने जोया की भूमिका निभाई है। कमलजीत सिंह बुनियाद के जमाने से भारत-पाकिस्तान से जुड़ी फिल्मों और सीरियलों में आ रहे हैं, इसमें वे अमृतसर में रहने वाली हीरोइन के पिता बने हैं। अभय देओल का रोल पहले पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान के लिए था, लेकिन वो नहीं मिल पाए, तो अभय देओल को लिया गया। कॉकटेल फिल्म से फिल्मों में आने वाली डायना पेंटी ने हरप्रीत कौर उर्फ हैप्पी का रोल सार्थक किया है। पीयूष मिश्रा ने बेहतर मनोरंजक पल जुटाए हैं।

मुदस्सर अजीज के निर्देशन में बनी यह फिल्म मोहेंजो दारो और रुस्तम के बाद दर्शकों की रूचि को बदलने में योगदान देगी। इस फिल्म को तनु वेड्स मनु के निर्देशक निदेशक आनंद रॉय ने प्रोड्यूस किया है। हैप्पी का भाग जाना किस तरह दो परिवारों से बढ़कर दो देशों और मीडिया का इवेंट बन जाता है यह दिलचस्प लगता है। आखिर में यह फिल्म कुछ घिसटती हुई लगती है, लेकिन फिर भी दर्शक मुस्कुराता हुआ घर पहुंचता है।