
गांधीजी व्यक्ति नहीं, विचार थे और अण्णा हजारे एक व्यक्ति हैं। गांधीजी पूरा भारतवर्ष थे और अण्णा हजारे रालेगांव सिद्धि। गांधीजी ने जो कुछ किया वह बेहद सुविचारित और लक्ष्यकेन्द्रित था। अण्णा हजारे के साथ ऐसा नहीं है। गांधीजी झंडा लेकर आगे चलते थे और पूरा देश उनके पीछे। अण्णा हजारे भी झंडा लेकर आगे-आगे चले, लेकिन उनके पीछे जो लोग थे, उनमें से कई ने उनके नेतृत्व को धता बता दी। गांधीजी बेरिस्टर थे और उस दौर की दुनिया की सबसे बुद्धिमान माने जाने वाली हस्तियां उनके संपर्क में थी। टैगोर से लेकर चार्ली चेप्लिन तक। अण्णा के साथ अरविन्द केजरीवाल, किरण बेदी जैसे लोग थे, जो मतलब निकलते ही छिंटक गए। गांधीजी अपनी हत्या के 68 साल बाद भी जीवित है और हमारे नेताओं के लिए आज भी एक बेशकीमती ‘कमोडिटी’ हैं। अण्णा हजारे को आज उन्हीं के लोगों ने दरकिनार कर दिया। गांधीजी के जीवन और उनके कार्यों पर बनी फिल्में आज भी सुपर-डुपर हिट होती है और ऑस्कर जीतती हैं। दुनिया के बेहतरीन फिल्मकार उनके पीछे भागते रहे, अण्णा के साथ शायद ऐसा नहीं है।

इसीलिए किसन बाबूराव हजारे उर्फ अण्णा हजारे के जीवन पर आधारित अण्णा फिल्म एक खराब डॉक्युमेंट्री की तरह है। बॉयोपिक बनाना वैसे भी आसान नहीं। कौन-सी बॉयोपिक दर्शकों को पसंद आएगी, यह भी देश, काल और परिस्थिति पर निर्भर करता है। भाग मिल्खा भाग, मैरी काम, मांझी, एम.एस. धोनी कुछ ऐसी फिल्में है, जो सही तरीके से सही वक्त पर प्रदर्शन के लिए आ गई। अगर अण्णा भी तीन साल पहले रिलीज होती, तो शायद सुपर-डुपर हिट होती।
कई बातें इस फिल्म में अटपटी लगती हैं। फौजी की ट्रेनिंग ले रहे अण्णा के साथ ही पूरी टुकड़ी दो दिन में ही बड़े अच्छे तरीके से कदमताल करती लगती है। सैनिक सरहद पर, वह भी युद्ध के माहौल में मोहब्बत और भाईचारे की बात नहीं करते। फिल्म में दिखाया गया कि एबीपी माझा पर हिन्दी में खबरें दिखाई जा रही है। जबकि एबीपी माझा मराठी चैनल है। फिल्म में युद्ध के दृश्य नकली लगते है। फिल्म देखते-देखते ही एहसास होता है कि यह अण्णा हजारे को और बड़े कद में पेश करने की पहल है। फिल्म के अंत में अण्णा का अनशन टूटते वक्त जिन लोगों को साथ दिखाया गया है, उनमें किरण बेदी बनी पात्र ऐसी है कि कहीं उसे देखकर किरण बेदी आत्महत्या न कर लें!
अण्णा हजारे के जीवन में चाहे जितने उतार-चढ़ाव आए हो, उन्हें लोग भले ही दूसरा गांधी कहे, लेकिन यह बात सब जानते है कि बादशाह खान और विनोबा भावे जैसी शख्सियतें गांधी का प्रतिरूप मानी जाती है। सेना में अण्णा हजारे ने परमवीर चक्र नहीं जीता। वे सेना में वाहन चालक थे। फौज में चूंकि सभी लोगों को रैंक दिया जाता है। इसलिए उन्हें भी रैंक प्रदान किया गया। अण्णा के जीवन में स्त्री सुख शायद नहीं है, इसलिए दर्शकों को भी इसमें कोई मसाला मिला नहीं। जो गाने ठूंसे गए है, वे भी अटपटे से लगते है। कभी-कभी लगता है कि हम मनोज कुमार की फिल्म देख रहे है और अण्णा हजारे ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’ टाइम कोई गाना गा रहे हैं।

फिल्म में शुरूआत में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि अण्णा हजारे बचपन से ही अन्याय के खिलाफ लड़ाई करते आए हैं (यह कुछ-कुछ वैसा ही है, जैसा कि नरेन्द्र मोदी बचपन में तालाब में से मगरमच्छ पकड़ कर ले आए थे)। छोटे कद के बावजूद वे सेना में गए और सैनिकों द्वारा की जाने वाली परेड के दौरान उनकी बुरी हालत हो जाती थी। मोर्चे पर वे नेताओं की तरह युुद्ध और शांति की बातें अपने साथी जवानों से करते हैं। यह थोड़ा अटपटा लगता है, क्योंकि मोर्चे पर गया जवान इतनी बातें नहीं सोचता। सेना से स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर अण्णा हजारे अपने गांव आते हैं। इस बीच उनके मन में आत्महत्या का ख्याल भी आता है, लेकिन ट्रेन लेट हो जाने की वजह से वे आत्महत्या नहीं कर पाते। इसी बीच स्वामी विवेकानंद और विनोबा भावे के विचार उन्हें प्रभावित करते है और वे रालेगांव सिद्धि आकर गांव का कायाकल्प करने में जुट जाते हैं। इस दौरा उनके सामने बहुत सारी चुनौतियां आती है, जिन्हें वे दूर करते हैं और अपने इलाके के सर्वमान्य नेता के रूप में उभरते हैं। गोविंद नामदेव ने फिल्म में गांव के साहूकार की भूमिका निभाई है और यह वैसी ही है जैसी मनोज कुमार की फिल्मों में होती थी। तनिषा मुखर्जी एबीपी माझा की रिपोर्टर है और रजित कपूर उस चैनल के रजत शर्मा। मराठी फिल्मों के अभिनेता शशांक उदापुरकर की शक्ल काफी कुछ अण्णा हजारे जैसी जरूर लगती है। उनके द्वारा बोले गए संवाद स्वाभाविक लगते है, लेकिन फिल्म के कई दूसरे संवाद उर्दू के शब्दों के कारण स्वाभाविक नहीं लगते। शशांक उदापुरकर ने ही इसकी स्क्रिप्ट भी लिखी है और डायरेक्ट भी किया है।
यह फिल्म अण्णा हजारे के जीवन पर कोई नया प्रकाश नहीं डालती। कभी डाक्युमेंट्री जैसी, तो कभी बॉलीवुड की किसी फॉर्मूला फिल्म की तरह फिल्म धीमी गति से बढ़ती है, जिसमें बहुत सारे फ्लैश बैक है।