
जब अजय देवगन ने अपनी फिल्म शिवाय निर्देशित करने का फैसला किया होगा, तब शायद उन्होंने यहीं सोचा होगा कि अगर मैं इस फिल्म को बनाने के लिए 105 करोड़ रुपए इन्वेस्ट कर रहा हूं, तो क्यों न फिल्म में मैं ही मैं नजर आऊं? इसीलिए फिल्म में केवल अजय देवगन ही अजय देवगन नजर आते है। शिवाय फिल्म अजय देवगन का पर्याय कही जा सकती है। एक बात तो तय है कि यह फिल्म देखने के बाद परिवार के साथ बुल्गारिया जाने वाले लोग दस बार सोचेंगे। इस फिल्म में बुल्गारिया की छवि एक ऐसे देश की बन गई है, जहां बच्चों के साथ अनैतिक कार्य करने का धंधा तो जोरों पर है ही, लोगों को अपह्रत करके उनके अंग निकालकर तस्करी करना और वेश्यावृत्ति कराना भी वहां का प्रमुख कार्य है। एक बात जरूर अच्छी हुई है कि इस फिल्म में बुल्गारिया के भारतीय दूतावास की भूमिका सकारात्मक दिखाई गई है, जिससे और कोई प्रसन्न हो या ना हो, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जरूर खुश होंगी।

शिवाय के साथ सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि तीन चौथाई से अधिक दृश्यों में अजय देवगन छाए हुए है। निर्देशक के रूप में अजय देवगन फिल्म की सख्त एडिटिंग नहीं करवा पाए और यह फिल्म लंबी होती गई। बड़ी मुश्किल से फिल्मों के दृश्य निकाले गए, लेकिन फिर भी बात बनी नहीं। इसमें दो मत नहीं कि इस फिल्म में शानदार एक्शन दृश्य है, जो यह साबित करते है कि अजय देवगन में उनके पिता वीरू देवगन की आत्मा आ गई है। यह बात और है कि इस फिल्म के अधिकांश एक्शन सीन अतिरंजित लगते है। ऐसा लगता है मानो अजय देवगन रजनीकांतनुमा होते जा रहे हैं। कभी लगता है कि आप शिवाय नहीं, बाहुबली जैसी कोई फिल्म देख रहे है। कभी यह लगता है कि यह फिल्म दृश्यम की अगली कड़ी है। तार्किक दृष्टि से देखे, तो दृश्यम ज्यादा तर्कपूर्ण लगती थी।

कई दर्शक मानते है कि अजय देवगन ने ज्वलंत मुद्दों को उठाकर फिल्म बनाई है। फिल्म में तो अतिरंजना होगी ही। हिमालय में फिल्माए गए एक्शन दृश्य वास्तव में विलक्षण है और बुल्गारिया में फिल्माए गए लगभग सभी एक्शन सीन पसंद किए जा रहे है। फिल्म में हीरो के अलावा सभी दूसरे कलाकार अपेक्षाकृत नए है। हिन्दी फिल्मों के दर्शकों से उनका परिचय भी बहुत कम है। बुल्गारिया की हीरोइन और बाल कलाकार के साथ ही बुल्गारिया के खलनायक भी है, जो हिन्दी दर्शको के लिए नए है। ये सभी कलाकार फिल्म में शिवाय बने अजय देवगन की भूमिका को ही उभारने का काम करते है।

दीपावली के मौके पर रिलीज होने वाली यह फिल्म करण जौहर की ए दिल है मुश्किल के सामने लगी है। फिल्म देखकर लौट रहे दर्शकों में उतनी निराशा नहीं, जितनी करण जौहर की फिल्म को लेकर है। धीरे-धीरे शिवाय देखने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है और सिंगल स्क्रीन थिएटर में तो शिवाय का अच्छा बोलबाला है।
