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ऊल जलूल मनोरंजन की फिल्म है बेफिक्रे ! आजकल के बेपरवाह युवकों के लिए यह पैसा वसूल टाइप. फिल्म में कहानी वगैरह बकवास है. वगैरह में आप डॉयलाग, गानों, कॉमेडी को हैं। यह एक रोमांटिक फैंटेसी है जिसमें खुलकर किस विस होते हैं, मोहब्बत में वफ़ा तो अब 90 के दशक की बात रह गई है। अब तो फ़ास्ट फ़ूड की तरह फास्ट रोमांस, गाने और पकड़म पाटी होती है. तर्क और दिमाग के लिए इसमें जगह कम है। अब प्रेम के लिए मिलने की बात नहीं होती, संबंधों के लिए होती है। इस फिल्म में साड़ी पवित्रता कपड़ों के साथ उतरती रहती है. हीरो अंडरवियर में, और हीरोइन बिकिनी में ! इस फिल्म में हीरो और हीरोइन दोनों की ही जबान और कपड़े बार बार फिसलते रहते हैं और बेचारा मल्टीप्लेक्स में बैठा दर्शक चाहकर भी सीटी नहीं बजा पाता और अंत में कुंठित होकर बाहर निकलता है।

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लड़का दिल्ली का है इसलिए एडवेंचर का प्रेमी तो होना ही था। अब एडवेंचर के लिए वह कोई तिरुपति के बालाजी तो जाएगा नहीं, वह जाता है फ़्रांस। फ़्रांस में तो पर्दादारी कम ही होती है इसलिए वहां पैदा हुई इंडियन लड़की वैसी है जिसे फिल्मवाले आजाद ख़याल मानते हैं। बस, हो जाता है बिना आई लव यू वाला रोमांस। अब रोमांस तो आखिर रोमांस है। विदेश में हो या झुमरीतलैया में ! भारतीय से हो या अफ़्रीकी से, आदित्य चोपड़ा करवाये या राज कपूर !

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बेफिक्रे में सुस्ती का माहौल बिलकुल नहीं है. उत्साह और मस्ती ही है और साथ में मनोरंजन के के क्षण भी है। किसी की भी उल जलूल हरकतें कोफ़्त पैदा कर सकती हैं, बोर नहीं करती। यही इस फिल्म की यूएसपी है। सिनेमाघर के युवा दर्शकों को और भी चाहिए क्या? एक दर्शक कह रहा था कि मेरे पैसे तो एक गाने में ही वसूल हो गए। वास्तव में फिल्म उसके दिमाग पर चढ़ गई होगी। फिल्म में न हीरो कमिटमेंट चाहता है और न हीरोइन। दोनों मस्ती करते हैं, बस। आज का नवजवान जो कुछ करना चाहता है और नहीं कर पाता, वह इस फिल्म का हीरो कर लेता है। आदित्य चोपड़ा की इच्छा यही रही होगी।

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फिल्म की प्रस्तुति दिलचस्प है। गानों की मज़ेदार तरीके से फिल्माया गया है। सुन्दर लोकेशंस हैं। सलमान तो केवल शर्ट उतारता है, यहाँ तो हीरो उससे भी आगे चला जाता है। लड़की भी ठिलवाई में पीछे नहीं है। आदित्य चोपड़ा ने दिलवाले दुल्हनियां..., मोहब्बतें और रब ने बना दी जोड़ी जैसी फ़िल्में बनाई हैं तो धीरे धीरे वे भी ट्रैक पर आने की कोशिश करते हैं और बिना आत्मा की मोहब्बत पर फिल्म खर्च कर देते हैं। वाणी कपूर हीरो से इक्कीस ही लगी है। फ़िल्म चलेगी क्योंकि मनोरंजक है !

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