Bookmark and Share

BINDU-1

कौन उल्लू का पट्ठा लेखक आजकल टाइपराइटर पर उपन्यास लिखता हैं? उपन्यास भी रोमन में टाइप करता है और रोमन हिन्दी में ही उसका उपन्यास छपता है ‘चुड़ैल की चोली’। मजेदार बात यह है कि यह लेखक चेतन भगत की तरह इन्वेस्टमेंट बैंकर रहता है, फिर नौकरी छोड़कर उपन्यास लिखने लगता है। इन्वेस्टमेंट बैंकरी के दौरान वह अपनी गर्लफ्रेंड के साथ घूमता है और बॉस का फोन आने पर ऊल-जलूल बहाने बनाता है, जैसे वह कोई सेल्समैन हो। फिल्म के निर्माता निर्देशक लेखक को इस पर भी चैन नहीं मिलता, तो वह हीरो की प्यारी बिन्दु को बायपोलर डिसऑर्डर की मरीज जैसा दिखाता है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि न तो हीरो, न हीरोइन का कोई भी खैरख्वाह यह बात समझा पाता है कि यह बेचारी तो एक तरह की मानसिक बीमारी की शिकार है। पल में तोला, पल में माशा होने वाली हीरोइन को ऐसा दिखाया गया है, मानो वह कोई परी हो। उसकी शादी तय होती है, तब वह दो बार घर से भाग जाती है। तीसरी बार उसका होने वाला पति भाग जाता है। अंत में वह किसी लल्लूू फटाखे से शादी करती है और हीरो को दुखी करके चली जाती है।

न हीरो को पता है कि उसे क्या करना है, न हीरोइन को। हीरो को लिखने की खुजाल है और वह मैनेजमेंट की डिग्री लेकर बैंकर बन जाता है, फिर चुड़ैल की चोली टाइप थर्ड रेट उपन्यास लिखकर भी अपने बंगाली समुदाय में सुपरस्टार की तरह माना जाता हैं। यह तो पूरे बंगाली भद्र समुदाय की बेइज्जती है। हीरोइन बेचारी गायिका बनना चाहती हैं और वाइस ओवर आर्टिस्ट का रोल भी करती है। इंटरवल के पहले तो गुदगुदाने वाले दृश्य अच्छे लगते है, लेकिन बाद में कोफ्त होती है कि किन लोगों के लिए फिल्म बनाई गई है।

BINDU-2

90 के दशक से कहानी शुरू होती है, लेकिन हीरोइन के कपड़े वैसे ही होते है, जैसे आजकल होते है। निर्देशक ने हीरो और हीरोइन के कुछ रोमांटिक सीन शूट किए होंगे और फिर बाद में कहानी की तलाश की होगी। मैरिन ड्राइव पर हीरोइन के साथ घूमना, दोनों का कार में पींगे मारना, पुराने हिन्दी गानों की नकल करना, हीरोइन की नटखट अदाएं और बांग्ला संगीत और फुटबॉल के प्रति दीवानगी लोगों को पसंद आ सकती है। डीवीडी के जमाने में ऑडियो कैसेट की तरह यह फिल्म दर्शकों को पुरानी दुनिया में जरूर ले जाती है। सगाई के वक्त भाग जाना, कोई आजाद खयाली नहीं, कम्युनिकेशन गैप है। आजकल की फिल्मों में सेक्स को लेकर जो खुलापन है, वह भी इस फिल्म में स्पष्ट है। जहां कोई किसी के साथ खाने-पीने, लड़ने-झगड़ने और सोने-उठने गुलेज नहीं करता। इसे ही आधुनिकता माना जा रहा है।

BINDU-3

फिल्म के बहुत से कैरेक्टर स्टीरियो टाइप हैं। बंगाली परिवार की फुटबॉल और संगीत के प्रति दीवानगी, मां का बेटे के प्रति लगाव, सेना अधिकारी का शराबी होना, गायिका बनने की तलाश में यहां-वहां भटकना और लेखक के संघर्ष को कॉमिक रूप दिया गया है। यशराज बैनर का नाम, अरिजित सिंह और परिणीति चौपड़ा के गाने, कौशर मुनीर का संगीत, आयुष्मान खुराना और परिणीति चौपड़ा की एक्टिंग के बावजूद फिल्म में वह मजा नहीं आता, जिसकी आशा लेकर दर्शक टिकिट खरीदता हैं। एक वर्ग को फिल्म पसंद आ रही है।

Search

मेरा ब्लॉग

blogerright

मेरी किताबें

  Cover

 buy-now-button-2

buy-now-button-1

 

मेरी पुरानी वेबसाईट

मेरा पता

Prakash Hindustani

FH-159, Scheme No. 54

Vijay Nagar, Indore 452 010 (M.P.) India

Mobile : + 91 9893051400

E:mail : prakashhindustani@gmail.com