
दिल जंगली इंटरवल तक तो दिलचस्प है, लेकिन उसके बाद बेहद पकाऊ, उबाऊ और झिलाऊ। फिल्म की कहानी दर्शकों को कन्वीन्स नहीं करती। लोकेशन्स अच्छी चुनी हैं। तापसी पन्नू को सुंदर दिखाने की कोशिश की और वे लगी भी, लेकिन कहानी के झोल दर्शक को झुला देते है। दिल जंगली की लेखक और निर्देशक आलिया सेन शर्मा हैं, जो 20 साल से विज्ञापन की फिल्में बना रही हैं। इस नाते उन्हें पता है कि दर्शकों की दिलचस्पी कैसे बनाई रखी जा सकती है, लेकिन यहां वे फ्लॉप हो गई हैं।
रोमांटिक कॉमेडी के नाम पर बनी यह फिल्म पिछले महीने रिलीज होने वाली थी, लेकिन अय्यारी से डरकर रिलीज नहीं की गई। अय्यारी भी औंधे मुंह गिरी। अब इसकी टक्कर चौथे नंबर की नफरत की कहानी और 3 कहानियां फिल्म से है। इसके लिए चुनौतियां अब भी बरकरार है। 3 स्टोरीज को तो दर्शकों के अभाव में शो निरस्ती का सामना करना पड़ रहा है और हेट स्टोरी 4 का अपना एक वर्ग है ही। पिंक और नाम शबाना जैसी फिल्मों में नाम कमाने वाली तापसी ने इस फिल्म में बिजनेस वुमन का रोल किया है। एक ऐसी बिजनेस वुमन का जो अपने पिता के कारोबार को आगे बढ़ाने में रूचि नहीं रखती।

इंटरवल के पहले निर्देशक ने दिलचस्प चित्र खींचे है। अरबपति पिता की साहित्य में रूचि रखने वाली बेटी, विधवा मां का जिम ट्रेनर बेटा, जिसका लक्ष्य है किसी भी तरह बॉलीवुड में जाकर नाम कमाना। यहां आड़े आ रहा है उसका दिल्ली में रहना और कमजोर इंग्लिश। फिल्मों में काम दिलाने का वादा करने वाले एजेंट ने कहा है कि अंग्रेजी अच्छी आनी चाहिए और साथ में कैश तो चाहिए ही। हीरो इसी उधेड़बुन में लगा है। अंग्रेजी सीखने के लिए ब्रिटिश काउंसलेट की कक्षा में जाता है, जहां उसकी टक्कर हो जाती है लंदन से आई अंग्रेजी पढ़ाने वाली टीचर से। फिल्म के ट्रेलर में ही लगभग सभी दिलचस्प बातें बताई जा चुकी है।

फिर फिल्म में शुरू हो जाता है मुंबइया फिल्मों वाला फॉर्मूला। विधवा मां बेटे से कहती है कि उस मंगली लड़की की मांग भरने के चक्कर में मैं अपनी कोख नहीं उजाड़ सकती। हीरो तो बेचारा हीरो है। मां का दिल नहीं तोड़ सकता। वह प्रेमिका का भी दिल नहीं तोड़ सकता। हालात ऐसे बनते है कि उन दोनों के चक्कर में हीरो का दिल टूट जाता है और गर्भ निरोधक के विज्ञापन की मॉडलिंग करते-करते 7 साल धक्के खाने के बाद उसे बॉलीवुड की फिल्मों और सीरियल में हनुमान का रोल करने का मौका मिल जाता है।
अब दिल्ली वाला जिम ट्रेनर फिल्मों के बहाने पहुंच जाता है लंदन। जहां उसे ठुकराने वाली हीरोइन बहुत बड़े बिजनेस टाइकून की बेटी है और उसकी शादी एक दूसरे बिजनेस टाइकून से ही होने वाली है। हीरोइन का होने वाला पति हैंडसम है, पैसे वाला है, शरीफ है और हीरोइन को चाहता है, लेकिन अगर फिल्म की डायरेक्टर और लेखिका उसे नहीं चाहे, तो उसकी मट्ठीपलीत होनी ही है। ऐसे बिरले नौजवानों से शादी करने के लिए लाखों लड़कियां मरती होंगी। पर हीरोइन का दिल जंगली है। दिल जंगली है, तो वह बार-बार फेरे के वक्त पलट जाती है।

बॉलीवुड वाले एनआरआई लोगों को लल्लू समझते है शायद। एनआरआई की बेटियों को लाजपत नगर की पानी-पूरी ज्यादा पसंद है, बजाय किसी फाइव स्टार के खाने के। ये एनआरआई लड़कियां बाप की दौलत को लात मारकर कड़के नौजवानों से शादी करने के लिए मरी जा रही है। ये एनआरआई भी विदेश में रहते है, पर इतने बड़े गधे है कि उन्हें अपने बच्चों की खुशियों का ध्यान ही नहीं और पैसे के पीछे ही भागते जाते है और चिंता करते है कि उनके बच्चे सेटल हो जाए। यह सबकुछ फिल्मों में ही संभव है।
जिम ट्रेलर के रूप में शाकिब सलीम ने अच्छा अभिनय किया है। तापसी पन्नू कोरोली नायर के रूप में और अभिलांश थपलिया हीरो के दोस्त प्रशांत के रूप में ठीकठाक है। फिल्म में पांच गाने है, जिसमें से चार पकाऊ है। 124 मिनिट की फिल्म में 17 मिनिट गानों को झेलना पड़ता है। बहुत ही अच्छा होता, अगर यह फिल्म इंटरवल तक ही बनाई जाती।