जब एलन मस्क का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड किया गया था, तब उन्होंने सोशल मीडिया पर सन्देश पोस्ट किया था -"सोच रहा हूँ, ट्विटर खरीद लूं!" इसे तब मजाक समझा गया था, पर आज यह सच्चाई है। मस्क ने इस माइक्रो ब्लॉगिंग साइट को खरीदने के लिए 44 बिलियन डॉलर, यानी 3,36.800 करोड़ रुपये की डील की हैं।
क्या होगा इसका असर, इसी पर चर्चा डॉ. अमित नागपाल और डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आगामी चुनाव में भाजपा को टक्कर देने के लिए प्रशांत किशोर यानी पीके की सेवाएं ले रही है। प्रशांत किशोर कांग्रेस नेताओं के सामने चुनाव लड़ने का खाका पेश कर चुके हैं। अभी पीके ने कांग्रेस की सदस्यता नहीं ली है, लेकिन चर्चा है कि वे जल्द ही कांग्रेस में किसी पद पर विराजित होंगे। क्या कहते हैं इस बारे में एआईसीसी के पूर्व सचिव पंकज शर्मा।
राम मंदिर, सीएए, ट्रिपल तलाक और अनुच्छेद 370 के बाद अब कॉमन सिविल कोड का मुद्दा उठाया जा रहा है। इसी मुद्दे पर संविधान के अध्येता और सामाजिक कार्यकर्ता सचिन कुमार जैन से चर्चा शाम 6 बजे
भोपाल में गृहमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में कॉमन सिविल कोड पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाना है। उसका ड्रॉफ्ट तैयार किया जा रहा है। कॉमन सिविल कोड के बाद आम जनजीवन पर क्या असर पड़ेगा? इसी की पड़ताल लाइव में...
Uniform Civil Code: देश में एक बार फिर से समान नागरिक संहिता पर बहस शुरू हो गई है. उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने का वादा किया है. लेकिन सवाल ये है कि क्या राज्य सरकार का ऐसा करने का अधिकार है.
Uniform Civil Code: उत्तराखंड में बीजेपी के पुष्कर सिंह धामी को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद मिल गया है. मुख्यमंत्री के लिए जैसे ही उनका नाम तय हुआ, वैसे ही उन्होंने फिर से समान नागरिक संहिता का सुर छेड़ दिया. उन्होंने कहा कि सत्ता संभालते ही सारे वादों को पूरा किया जाएगा, जिसमें समान नागरिक संहिता का वादा भी शामिल है. धामी चुनाव प्रचार के दौरान भी कई बार समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कर चुके हैं.
समान नागरिक संहिता एक ऐसा मुद्दा है, जो हमेशा से बीजेपी के एजेंडे में रहा है. 1989 के लोकसभा चुनाव में पहली बार बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में समान नागरिक संहिता का मुद्दा शामिल किया. 2019 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में भी बीजेपी ने समान नागरिक संहिता को शामिल किया था. बीजेपी का मानना है कि जब तक समान नागरिक संहिता को अपनाया नहीं जाता, तब तक लैंगिक समानता नहीं आ सकती.
समान नागरिक संहिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट से लेकर दिल्ली हाईकोर्ट तक सरकार से सवाल कर चुकी है. 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए कोई कोशिश नहीं की गई. वहीं, पिछले साल जुलाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा था कि समान नागरिक संहिता जरूरी है.
समान नागरिक संहिता यानी सभी धर्मों के लिए एक ही कानून. अभी होता ये है कि हर धर्म का अपना अलग कानून है और वो उसी हिसाब से चलता है.
- हिंदुओं के लिए अपना अलग कानून है, जिसमें शादी, तलाक और संपत्तियों से जुड़ी बातें हैं. मुस्लिमों का अलग पर्सनल लॉ है और ईसाइयों को अपना पर्सनल लॉ. - समान -नागरिक संहिता को अगर लागू किया जाता है तो सभी धर्मों के लिए फिर एक ही कानून हो जाएगा. मतलब जो कानून हिंदुओं के लिए होगा, वही कानून मुस्लिमों और ईसाईयों पर भी लागू होगा. - अभी हिंदू बिना तलाक के दूसरे शादी नहीं कर सकते, जबकि मुस्लिमों को तीन शादी करने की इजाजत है. समान नागरिक संहिता आने के बाद सभी पर एक ही कानून होगा, चाहे वो किसी भी धर्म, जाति या मजहब का ही क्यों न हो.
क्या खरगोन में रामनवमी को हुई हिंसा साजिश थी? एक ही पैटर्न पर सांप्रदायिक दंगे की आग क्यों धधकती है? दंगे में ना सिर्फ पथराव बल्कि लाठी-डंडे, पेट्रोल बम और छर्रे वाली देसी पिस्तौले भी इस्तेमाल की गई। रामनवमी की शोभायात्रा पर चौतरफा पत्थरों की बरसात, लाठी-डंडों-तलवारों से लैस अचानक घरों से निकले लोग, आगजनी की वारदातें क्या इशारा है? 22 अक्टूबर 2015 को रावण दहन कर लौट रहे लोगों पर इसी तरह पत्थर बरसाए गए थे।
वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र वैद्य बताएँगे कि इन दंगों का पॉलिटिकल कनेक्शन क्या है? सख़्ती और बुलडोज़र एक्शन का क्या रिएक्शन हो सकता है?
अरबों लोगों का बोझ ढोने वाली पृथ्वी अनेक पर्यावरण चुनौतियों से जूझ रही है। 1970 से मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस एक औपचारिकता बनता जा रहा है। पूरी दुनिया आपसी युद्ध, आर्थिक प्रतिबंध, हथियारों की होड़ और पर्यावरण की बेफिक्री में जुटी हैं। अरबों लोगों के जीवन का आधार पृथ्वी की उपेक्षा हो रही हैं। यह उपेक्षा हमें कहा तक ले जाएगी, इसी पर चर्चा।
मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और केन्द्र में मंत्री रहीं उमा भारती अपनी ही सरकार के लिए आए दिन चुनौतियां खड़ी करती रहती हैं। वे शिवराज सिंह को अपना भाई कहती हैं, लेकिन भाई ही अपनी बहन की गतिविधियों के सामने असहाय नजर आता हैं।
कभी वे शराबबंदी की घोषणा करती हैं और शराब की दुकान में पत्थर फेंकती हैं, तो कभी रायसेन के सदियों पुराने शिव मंदिर में जलाभिषेक की घोषणा करके सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती खड़ी कर देती हैं। उनकी यह फितरत सत्ता के लिए बेचैनी हैं या अपनी अहमियत दिखाने की कोशिश? इसी पर चर्चा करेंगे वरिष्ठ पत्रकार अरुण दीक्षित से।
कनिष्क तिवारी (Kanishk Tiwari) सीधी (Sidhi) के रहने वाले पत्रकार हैं। वे एक नेशनल न्यूज चैनल से जुड़े हैं और अपना यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं।
पुलिस ने रंगकर्मी और इंद्रावती नाट्य समिति के निदेशक नीरज कुंदेर को बीजेपी विधायक केदारनाथ शुक्ला और उनके बेटे गुरुदत्त के बारे में अभद्र टिप्पणी करने पर जेल भेज दिया था। जिस पर कनिष्क साथियों के साथ कोतवाली में पहुंचे थे। यहां पुलिस ने मामले को कवर करने पहुंचे कनिष्क को दूसरे लोगों के साथ गिरफ्तार कर लिया
कनिष्क और साथियों के बदसलूकी करनेवाले थाना प्रभारी और एसआई को निलंबित कर दिया गया था।
सीधी पुलिस के कोतवाली थाने में दो अप्रैल को पत्रकारों और रंगकर्मियों के साथ अमानवीय कृत्य किया गया और उन्हें निर्वस्त्र कर दिया गया। पिछले दिनों यह घटना जब सुर्खियां बनी तब दो दिन से हल्ला मचा और टीआई व सब इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया गया।
पुलिस के इस अमानवीय कृत्य पर राज्य मानव अधिकार आयोग ने पुलिस महानिदेशक व आईजी रीवा से सात दिन में रिपोर्ट मांगी और पुलिस मुख्यालय ने एसएसपी रेडियो अमित सिंह को जांच अधिकारी बनाकर भेजने के आदेश दिए।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) ने इस बारे में गृह मंत्रालय से दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की गुजारिश की है.
पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक अजय विश्नोई (BJP MLA Ajay Vishnoi) ने बेबाकी से शिवराज सिंह चौहान की सरकार को सलाह दी है कि उत्तरप्रदेश के योगी आदित्यनाथ की शराब नीति को फॉलो करें, तो बीजेपी को ज्यादा वोट मिलेंगे। अजय विश्नोई की शराब बंदी, मध्यप्रदेश के भाजपा सरकार और बुलडोजर मामा के बारे में राय।
जाने-माने पत्रकार और इतिहास के शोधार्थी विजय मनोहर तिवारी से बातचीत।
धार की भोजशाला जैसा ही विवाद अब रायसेन में सोमेश्वर मंदिर को लेकर चल रहा हैं। भोजशाला में वाग्देवी की प्रतिमा ताले में बंद हैं, उसी तरह मध्यप्रदेश के रायसेन में सोमेश्वर मंदिर के शिव ताले में बंद हैं।
अयोध्या में बाबरी ढांचे को गिराने में भूमिका निभाने वाली मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अब रायसेन के सोमेश्वर मंदिर के शिव को तालों से मुक्त कराने की घोषणा की हैं। उमा भारती 11 अप्रैल को सोमेश्वर धाम महादेव मंदिर में गंगा जल से अभिषेक करने वाली हैं।
सीहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा कथावाचक ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया हैं और संभव है कि आगामी मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले रायसेन भी धार की तरह हो जाए।
रायसेन में बाहरवीं सदी के इस मंदिर के पठ साल में केवल महाशिवरात्रि के दिन खुलते हैं। जैसे भोजशाला में वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा की इजाजत है।