
इंदौर में ऐसी अनेक हस्तियां हैँ जो दुनियाभर में पहचानी जाती हैं. इंदौरियों को उनकी कद्र हो या न हो; उन्हें इंदौर की माटी की कद्र है। अगर ये लोग दिल्ली या परदेस जाकर बस गए होते तो दुनियाभर में उनकी अलग ही पहचान होती। अपने-अपने क्षेत्र में इन्होँने जो योगदान दिया है, वह विलक्षण है। इंदौर उनके ऋण से कभी उऋण नहीं हो सकता। ऐसे ही कुछ ख़ास इंदौरियों को हम कह कि ये घर के जोगी हैँ। आन गाँव में तो इन्हें सिद्ध कहा जाता।
लम्बी फेहरिस्त है इंदौर से जुड़े महान लोगों की। डॉ आम्बेडकर, लता मंगेशकर, सलमान खान, एम एफ़ हुसैन, किशोर कुमार, सितारवादक रईस ख़ान साहब, अमीर खान साहब, हफीज कांट्रेक्टर, जादूगर आनन्द, पलक मुछाल, खिलाड़ियों में सीके नायडू, मुश्ताक अली,चंदू सर्वटे , शंकर लक्ष्मण, मीररंजन नेगी, अमय खुरासिया, नरेन्द्र हिरवानी जैसी हस्तियों ने इंदौर का मान बढ़ाया है। महादेवी वर्मा की शादी इंदौर में हुई थीं, करियप्पा और राजसिंह डुंगरपुर ने डेली कॉलेज़ में पढ़ाई की थी। 1966 में मिस वर्ल्ड चुनीं जाने वाली डॉ रीता फारिया महू की थीं। मिस एशिया हिमांगिनी सिंह यदु और मिसेस इंडिया इंटरनेशनल अमिता मोटवानी इंदौर की हैँ। पूजा बत्रा और सेलिना जेटली भी महू में रह चुकी हैं। फील्ड मार्शल मानक शॉ, जनरल सुंदरजी भी महू मेँ पदस्थ रह चुके हैँ।
डॉ. ललित मोहन पंत
पूरी दुनिया में परिवार नियोजन के सबसे ज्यादा करनेवाले डॉ पंत गिनीस बुक मेँ दर्ज है। वे 3 लाख 10 हजार से भी ज्यादा ऑपरेशन कर चुके हैं। अगर ये ऑपरेशन नहीं किये जाते तो आज भारत की आबादी करीब दस लाख और ज्यादा होती। उन्होंने परिवार नियोजन की जो पद्धति विकसित की है, उसे सीखने के लिए दुनिया भर से चिकित्सक उनकी पास आते हैँ। उन्होंने 24 घंटे में 816 से भी ज्यादा ऑपरेशन का रेकॉर्ड बनाया है। वे दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) पध्धति से ऑपरेशन ,जिसमें न तो चीरा जाता है और न ही टांके की जरूरत पड़ती है। उनकी टेक्नीक से वे केवल 20 सेकंड में एक नसबंदी कर सकते हैं. डॉ. पंत 1982 से परिवार कल्याण के ऑपरेशन कर रहे हैं . कई देशों से उन्हें आमंत्रण आ चुका है कि वे उस देश की नागरिकता लेकर वहाँ सेवा कार्य करें, लेकिन उन्होंने शासकीय सेवा को ही अपना ध्येय बना रखा है. जो ओपरेशन वे सरकारी अस्पताल में करते हैं वही कार्य कुछ निजी अस्पताल में भी होता है और वे उसके लिए 15000 रुपये न्यूनतम वसूलते हैं . इसका अर्थ यह हुआ कि अगर वे ये 310000 ऑपरेशन निजी क्षेत्र में करते तो उनकी कमाई बाज़ारभाव से 465 करोड़ रुपये होती .
संजय जगदाले और सुशील दोषी
क्रिकेट के समर्पित संजय जगदाले सादगीपसंद हैं, दिखावे से कोसों दूर. खुद प्रथम श्रेणी क्रिकेटर रहे . क्रिकेट को धंधा नहीं बनाया. भारतीय क्रिकेट की चयन समिति में रहे हैं और बीसीसीआई के सचिव भी लेकिन कभी रौब गाँठा. उनके मार्गदर्शन में सैकड़ों खिलाड़ी तैयार हुए हैं. नरेन्द्र हिरवानी, वीवीएस लक्ष्मण, नमन ओझा, मुरली कार्तिक, हृषिकेश कानिटकर, विपिन आचार्य और श्रीधरन श्रीराम जैसे खिलाड़ियों को चमकाने का श्रेय जगदाले साहब को है. क्रिकेट की कमेंटरी को मध्यम बनाकर क्रिकेट को जान जान तक पहुँचाने का काम सुशील दोषी ने किया है. सुशील दोषी ने क्रिकेट की कमेंटरी हिन्दी में शुरू की तब लोग उन पर हँसते थे और कहते थी की क्रिकेट तो अँग्रेज़ों का खेल है उसकी कमेंटरी हिन्दी में कैसे होगी? लेकिन जब सुशील दोषी ने हिन्दी में अपने शब्द और अपनी शैली विकसित कर ली तब उनके नाम का डंका बजाने लगा .धर्मयुग के संपादक डॉ. धर्मवीर भारती की राय उनके बारे में यह थी कि सुशील दोषी ने क्रिकेट के बहाने हिन्दी की बहुत बड़ी सेवा की है और वे जितने बड़े सेवक क्रिकेट के हैं, उससे बड़े सेवक हिन्दी के हैं. इंदौर के होलकर क्रिकेट स्टेडियम का कमेंटरी बॉक्स सुशील दोषी के नाम है .
डॉ. राहत इंदौरी
राहत इंदौरी इंदौर के ब्रांड अम्बेसेडर हैं. उनके नाम में ही इंदौरी है और दुनियाभर के मुशायरों और कवि सम्मेलनों में वे शिरकत करने जाते हैं . वे इस दौर के बेहतरीन शायरों में शुमार हैं.
बहुत कम लोग जानते हैं कि डॉ. राहत इंदौरी मूलत: पेंटर हैं और हुसैन की तरह ही उन्होंने भी गर्दिश के दिनों में सिनेमा के होर्डिंग्स की चित्रकारी की है . मिशन कश्मीर, मुन्नाभाई एमबीबीएस, इश्क़, मीनाक्षी, हमेशा, नाराज़, इंतेहाँ, जुर्म जैसी की फिल्मों में गाने लिख चुके हैं, लेकिन इंदौर की मोहब्बत उन्हें मुंबई से इंदौर खींच लाई.
प्रचार से दूर अनेक नाम
इंदौर में ऐसे भी अनेक लोग हैं जो समाज में अपनी जगह चुपचाप विलक्षण कार्य कर रहे हैं, लेकिन प्रचार नहीं चाहते या प्रचार से दूर रहना पसंद करते हैं . आनंदमोहन माथुर, डॉ पी. एस. हार्डिया, प्रीतमलाल दुआ, प्रभु जोशी, ईश्वरी रावल, अनिल त्रिवेदी, पेरिन दाजी, मुकुंद कुलकर्णी इनमें से कुछ नाम हैं . यह लिस्ट बहुत ही लंबी होगी, इसे पूर्ण नहीं माना जाए. इंदौर में ऐसे सैकड़ों लोग हैं, जिनका यह शहर आभारी है और रहेगा. इन लोगों ने इस शहर की आत्मा को सींचा है.
--प्रकाश हिन्दुस्तानी
30 अप्रैल 2014