
कोई भी न्यायालय अपने सामने रखे गए तथ्यों और गवाहों के आधार पर ही फैसला देता है। न्यायालय के सामने अभियोजन पक्ष ने जो भी गवाह और सबूत पेश किए, उन्हें नाकाफी मानते हुए अदालत ने कहा कि इन तथ्यों के आधार पर सलमान खान को दोषी नहीं कहा जा सकता। सलमान खान का इस तरह बरी होना सोशल मीडिया पर उपहास और तानाकशी की घटना हो गई। आम लोगों ने इसे अपने-अपने तरीके से समझा और अपनी प्रतिक्रिया दी। इनमें कई प्रतिक्रियाएं तो ऐसी भी थी, जिनमें भारतीय न्याय व्यवस्था का खुलकर मजाक उड़ाया गया।
सोशल मीडिया पर सलमान खान की मौजूदगी और सक्रियता हमेशा से चर्चा का विषय रही है। बरी होने के बाद सलमान खान ने जो ट्वीट किया था, उसमें लिखा था कि मुझे न्याय व्यवस्था पूरा भरोसा रहा है। लोगों ने इसमें भी मजाक खोज लिया। टीवी एंकर अंजना ओम कश्यप ने ट्वीट किया कि आखिरकार हमें पता चल ही गया, वास्तव में शराब तो वह कार पीये हुए थी।

सलमान की रिहाई का आदेश देने वाले न्यायमूर्ति ए.आर. जोशी के प्रति वकीलों के मन में बेहद सम्मान है और उन्होंने ऐसे ट्वीट भी किए है कि जस्टिस जोशी कोई भी फैसला गलत नहीं ले सकते। सलमान के विरोधियों ने ये ट्वीट किया कि बीइंग ह्यूमन सलमान का केवल एनजीओ है, जिसका काम मुनाफा कमाना है।
किसी ने लिखा कि मॉल, कार और न्याय पालिका केवल अमीरों के लिए होती है। किसी ने लिखा कि लोग अपराधी नहीं होते, बस वे गरीब होती है। यह भी लिखा गया कि भारत में गरीब या सामान्य परिवार में जन्म लेना ही सबसे बड़ा अपराध है। किसी ने यह प्रतिक्रिया दी कि 2015 के दो सबसे बड़े रहस्य यह है : कटप्पा ने बाहुुबलि को क्यों मारा ? और भाई की कार को कौन चला रहा था ? पायल दास नामक एक युवती ने ट्वीट किया कि भारतीय न्याय पालिका को फ्लीपकार्ट पर डाल देना चाहिए, ताकि कोई भी उसे खरीद सके। एक प्रतिक्रिया यह भी थी कि ड्राइवर लेस गूगल कार आने के काफी पहले भारत में 2002 में ही ड्राइवर लेस कार आ गई थी, जिसमें सलमान खान सवार थे। 
कई लोगों को लगता है कि सलमान सेलेब्रिटी और सम्पन्न होने के कारण बच गए। अगर आपको किसी की हत्या करने के बाद भी स्वतंत्र होकर घूमना है, तो पहले करोड़पति बन जाइए। गौ हत्या से जोड़ते हुए इस फैसले पर टिप्पणी दी गई कि अगर सलमान की कार से कोई गाय मर जाती तो निश्चित ही सलमान को जेल जाना पड़ता। यह तंज भी किया गया कि निश्चित ही वह कार पीके थी, जैसे राजस्थान का काला हिरण पीके था।

भारत में गरीबों को न्याय नहीं मिल पाता, इस आशय का ट्वीट किया गया कि सभी न्यायालयों के बाहर यह बैनर लगा देना चाहिए- नॉट फॉर पुअर। भारतीय न्याय व्यवस्था को ही अपराधी बताने वाले और उसकी तुलना धंधा करने वाली महिलाओंं से करने वाले संदेश भी लोगों ने लिखे। अगर न्यायपालिका इन मुद्दों को गंभीरता से ले, तो कई लोगों को जेल की हवा खानी पड़े।
न्याय पालिका में पैसे के दखल को समझाते हुए यह ट्वीट देखने को मिला कि अगर सलमान खान को सजा हो जाती, तो रुपए पर से मेरा विश्वास टूट जाता। आसाराम बापू के समर्थक बनने का प्रहसन करते हुए किसी ने लिखा कि सलमान खान की रिहाई के बाद अब आसाराम बापू भी आशा भरी निगाहों से कोर्ट जाने लगे है। सलमान के फैसले पर एक संदेश यह भी था- इफ यू आर बीइंग ह्यूमन, यू डोंट हेव टूू केयर फॉर ह्यूमन बीइंग। 
भारतीय न्याय व्यवस्था की कमियों पर इशारों करते हुए किसी ने लिखा कि यह बात गरीमाहीन है कि अगर आप करोड़पति हों, तो भी निरअपराधी घोषित होने में 13 साल लग जाते है। 13 साल का यह लंबा इंंतजार किसी के लिए भी यातना भरा हो सकता है। सलमान के चाहने वालों ने सोशल मीडिया पर सलमान की तस्वीर को लड्डू खिलाते हुए फोटो भी शेयर किए है। आमतौर पर बॉलीवुड में सभी क्षेत्रों में सलमान खान की मुक्ति से राहत प्रदर्शित की गई।
