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सीरियल ‘सास भी कभी बहू थी’ की बहू स्मृति ईरानी ने उस सीरियल में जितनी अच्छी-अच्छी साड़ी पहनकर फोटो नहीं खिंचवाए होंगे, उससे ज्यादा आजकल उनकी नई-नई साड़ियों वाली तस्वीरें मीडिया में आ रही है। ये तस्वीरें वे जानबूझकर हैंडलूम के उत्पादों के प्रचार के लिए पहन रही है और सोशल मीडिया पर शेयर कर रही है। ट्विटर पर तो उन्होंने आईवीयर हैंडलूम हैशटैग से अभियान चलाया है, जो देखते ही देखते सुपरहिट हो गया।

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स्मृति ईरानी ने वाराणसी में राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस पर कहा कि मैं हैंडलूम की साड़ियां पहन रही हूं और चाहती हूं कि देश के नागरिक भी हैंडलूम के उत्पादों का उपयोग करें, ताकि लाखों बुनकरों को रोजगार के मौके मिल सके। स्मृति ईरानी ने ई-कॉमर्स की वेबसाइट के जरिये हैंडलूम के उत्पादों की खरीदी पर भी खुशी जाहिर की है और आशा की है कि ई-कॉमर्स के माध्यम से भारतीय हैंडलूम दुनियाभर में लोकप्रिय होंगे।

सबसे पहले स्मृति ईरानी ने हैंडलूम की साड़ी पहनकर अपना फोटो ट्वीट किया था। उनके बाद सोशल मीडिया पर हैंडलूम के कपड़े पहनकर अपने फोटो शेयर करने की बाढ़ आ गई। अलग-अलग क्षेत्रों की सेलिब्रिटी हैंडलूम के कपड़े पहनकर अपनी सेल्फी सोशल मीडिया पर शेयर कर रही है। इनमें फिल्म कलाकार उद्योगपति बैंकर, लेखक, खिलाड़ी हर क्षेत्र के लोग है। राजनीतिज्ञ तो सबसे ज्यादा है। स्मृति ईरानी के समर्थन में मॉडल और अभिनेता मिलिंद सोमण सबसे पहले हैंडलूम के प्रचार में आगे आ गए हैं।

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हांगकांग, सिंगापुर, लंदन, सेन फ्रांसिस्को, लिस्बन, बैंकॉक आदि दुनियाभर के प्रमुख शहरों में लोग खादी या हैंडलूम के कपड़े पहनकर अपनी फोटो शेयर कर रहे हैं। इनमें न केवल भारतीय मूल के लोग है, बल्कि विदेशियों की भी अच्छी खासी संख्या है। लोग अपने स्कूल जाने वाले बच्चों को हैंडलूम की पोशाख पहनाकर उनकी फोटो शेयर कर रहे हैं।

जैकी श्राफ, कंगना राणावत, निरुपमा राव, किरण बेदी, दिलीप चटर्जी, सचिन खरे, लैला तैय्यब जी जैसी विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां हैंडलूम के प्रचार-प्रसार में सामने आ गई है। हैंडलूम के वस्त्रों को फैशन का अंग माना जाने लगा है। हैंडलूम के वस्त्रों को लेकर लोग अपनी शिकायतें भी कपड़ा मंत्री तक पहुंचा रहे है। लोगों को लगता है कि हैंडलूम के वस्त्र दूसरे कपड़ों के मुकाबले चार गुना तक महंगे है और उन्हें मेंटेन करना खासा महंगा और मेहनत का काम है। इस कारण केवल राजनीतिज्ञ और शीर्ष के नौकरशाह ही हैंडलूम के कपड़े पहन पाते है। इसके जवाब में कपड़ा मंत्रालय ने कहा है कि अगर हैंडलूम की खपत और बढ़ेगी, तो ज्यादा उत्पादन होने से उसकी लागत में कमी आ जाएगी।

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हैंडलूम के कपड़े बनाने वाले कारीगरों की मेहनत के बारे में भी लोगों ने सोशल मीडिया पर बातें लिखी है। बताया गया है कि केवल एक फुट का कपड़ा बनाने के लिए बुनकर को चार हजार बार अपने हाथ और पैर से करघे को आगे-पीछे करना पड़ता है। इतनी मेहनत के बाद भी जो कपड़ा बनता है, उसकी लागत थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन भारत में बड़ी संख्या में लोग चीन से आने वाला सस्ता कपड़ा उपयोग में ले आते है।

स्मृति ईरानी ने अपने अभियान की शुरूआत दिलचस्प अंदाज में की। उन्होंने हैंडलूम की बनी शानदार साड़ी पहनकर अपना फोटो खिंचवाया और उसे ट्वीट कर दिया, उस ट्वीट में उन्होंने हैंडलूम के समर्थन में सामने आने वाली पांच महिलाओं को टैग कर दिया। अपील की गई थी कि वे पांचों महिलाएं पांच-पांच लोगों को ट्वीट करेंगी और उसमें उन महिलाओं को टैग करके जोड़ा जाएगा। इस तरह एक से पांच, पांच से पच्चीस, पच्चीस से एक सौ पच्चीस और एक सौ पच्चीस से छह सौ पच्चीस की गति से यह अभियान बढ़ता जा रहा है। फैशन डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया ने उनके अभियान को सराहा और सहयोग दिया। काउंसिल के अध्यक्ष सुनील सेठी ने भी हैंडलूम के प्रति अपने प्रेम को जताने वाले संदेश सोशल मीडिया पर शेयर किए। राजेश प्रताप और रोहित बल जैसे डिजाइनर भी इस मौके पर आगे आए और अभियान का हिस्सा बन गए। क्रिकेटर वीरेन्द्र सहवाग, बॉक्सर विजेंद्र सिंह, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत, सुषमा स्वराज, मेनका गांधी, रूचिरा कंबोज, विद्या बालन, मनोज वाजपेयी जैसे लोग आकर हैंडलूम के इस अभियान में जुट गए। 24 घंटे में ही इस अभियान से 50 लाख से ज्यादा लोग जुड़ गए थे। ट्विटर पर इससे जुड़ने वालों की संख्या डेढ़ करोड़ से सवा दो करोड़ के बीच पहुंच गई।

स्मृति ईरानी का संदेश बिलकुल साफ है- सही पसंद, सही जगह और सही समय। उनके अभियान का नतीजा है कि विदेश में रहने वाले भारतीय हैंडलूम को तेजी से अपनाते जा रहे है और उसे भारतीयता का प्रतीक मान रहे हैं। कपड़ा मंत्रालय भी कपड़े की क्वालिटी के लिए हालमार्क जैसी मार्किंग करने जा रहा है। पावर लूम से बने कपड़ों के बजाए, हैंडलूम से बने कपड़ों को बढ़ावा देने का यह अभियान आगे भी जारी रहने वाला है और इससे वे लोग लाभांवित होंगे, जो समाज के सबसे कमजोर तबके से आते है।

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13 Aug.2016

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