Bookmark and Share

subah3sept2016

गत दिवस पेट्रोल और डीजल के दाम में हुई वृद्धि को लेकर सोशल मीडिया में मोदी सरकार के खिलाफ जितना लिखा गया है, उतना बहुत कम मौके पर लिखा गया। इस बार कांग्रेस और अन्य विरोधी दलों के नेता और कार्यकर्ताओं ने भी मोर्चा संभाल लिया है। कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर तो मोदी सरकार की जमकर खिंचाई हो रही है। विपक्ष में रहते हुए नरेन्द्र मोदी और बीजेपी के नेताओं ने जो बयानबाजी की थी, उनको दोहराया जा रहा है और याद दिलाया जा रहा है कि पहले क्या-क्या कहा था, भाजपा और मोदी जी ने।

 petrol2

2014 के लोकसभा चुनाव के पहले बीजेपी की तरफ से लगाए गए होर्डिंग्स की तस्वीरों को लोग शेयर कर रहे है। उन होर्डिंग्स पर नरेन्द्र मोदी और कमल के साथ नारे लिखे हुए थे- बहुत हुई जनता पर पेट्रोल-डीजल की मार, अबकी बार मोदी सरकार। महाराष्ट्र कांग्रेस की तरफ से 23 मई 2012 को नरेन्द्र मोदी का वह ट्वीट फिर शेयर किया जा रहा है, जिस पर लिखा था कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से जनता पर महंगाई की मार और तीखी हो गई है। मजेदार बात यह है कि जिस ट्वीट में नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार लिखा था, उसे काटकर लोगों ने बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार लिख दिया।

कांग्रेस के अलावा बहुत सारे लोगों ने दालों और सब्जियों की महंगाई का भी जिक्र किया है और लिखा है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से खाने-पीने की चीजें भी और महंगी हो जाएगी। अब इतनी महंगाई आम आदमी कैसे सहन करें? कई लोगों ने आंकड़े दिए है कि जब नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बने थे, तब मई 2014 में क्रूड आइल के दाम 107 डॉलर प्रति बैरल थे और पेट्रोल था 71.41 रुपए प्रति लीटर, अब क्रूड आइल का दाम है 46 डॉलर प्रति बैरल और पेट्रोल है करीब 64 रुपए लीटर (यह दिल्ली का भाव है)।

petrol-new

कई लोगों का कहना है कि सरकार बार-बार प्रचार करके पेट्रोल-डीजल के दाम 50 पैसे से रुपए तक कम करती है, लेकिन जब बढ़ाने होते है, तब वे दाम थोक में 3.5-4 रुपए तक बढ़ा दिए जाते है। राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों का टैक्स इस पर भी लग जाता है और यह वृद्धि ज्यादा मारक हो जाती है। ऐसे में सरकार बार-बार पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों घटाती है, जब घटाना हो तब सोच-विचारकर घटाए और जब बढ़ाना हो तब भी इस बात पर गौर करें कि इससे आम आदमी का जीवन कितना मुश्किल हो जाएगा। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के कारण मुद्रा स्थिति भी बढ़ेगी और रुपया तो पहले ही डॉलर के सामने बेहोशी की हालत में आईसीयू में है।

मास मीडिया पर भी कई लोगों ने गुस्सा निकाला है और कहा है कि हमारे अखबार और टीवी चैनल लोगों की दिक्कत सरकार तक नहीं पहुंचा रहे है और चीयर लीडर की भूमिका निभा रहे है। यह बेशर्मी की इंतेहा है। एक स्वर में लोगों की आवाज है कि पेट्रोल-डीजल के दाम जिस अनुपात में घटने चाहिए थे, वे नहीं घटे है। ऐसे में मनमोहन सिंह की पुरानी सरकार बधाई की पात्र है, जिसने 120 डॉलर बैरल क्रूड आइल होने पर भी महंगाई ज्यादा नहीं बढ़ने दी।

प्रधानमंत्री के नसीब वाले और बदनसीब वाले बयान को भी लोगों ने खूब याद किया। यह भी कहा कि प्रधानमंत्री बिना तर्कों की बात करते है और वह वहीं बात कहते रहते है, जो उन्हें मुफीद लगती है। हाल ही की मूल्यवृद्धि तो एकदम गैरवाजिब है, क्योंकि क्रूड आइल के दाम उतने ज्यादा नहीं बढ़े, जितने भारत में पेट्रोल के दाम बढ़ रहे है। इस तरह की मनमानी मूल्य वृद्धि के खिलाफ देशभर में आंदोलन की बातें भी कही गई है। सीधा-सीधा आरोप लगाया कि यह सरकार आम जनता के फायदे की बात तो कभी होने ही नहीं देती। जब क्रूड आइल के दाम 20 प्रतिशत घटे थे, तब पेट्रोल की कीमतें केवल 30 पैसे घटी और जब क्रूड आइल की कीमतें 15 प्रतिशत बढ़ी, तब पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई 3.50 रुपए लीटर। वास्तविकता यह है कि 2014 के बाद क्रूड आइल के दाम केवल 10 प्रतिशत ही बढ़े है। हाल यह है कि जब क्रूड आइल के दाम प्रति बैरल 10 डॉलर तक कम हुए थे, तब सरकार ने एक पैसे का फायदा लोगों तक नहीं पहुंचने दिया। मनमोहन सिंह को याद करते हुए लोगों ने लिखा कि इन अच्छे दिनों से तो बीते दिन ही अच्छे थे।

3 Sept 2016

Search

मेरा ब्लॉग

blogerright

मेरी किताबें

  Cover

 buy-now-button-2

buy-now-button-1

 

मेरी पुरानी वेबसाईट

मेरा पता

Prakash Hindustani

FH-159, Scheme No. 54

Vijay Nagar, Indore 452 010 (M.P.) India

Mobile : + 91 9893051400

E:mail : prakashhindustani@gmail.com