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सेंसरबोर्ड को चाहिए था कि वह फीवर फिल्म को ए के बजाय बी सर्टिफिकेट देता। बी यानि बकवास। सचमुच फीवर एक सस्पेंस थ्रिलर है। सस्पेंस यह कि आकाशवाणी के धीमी गति के समाचार टाइप 127 मिनिट की इस फिल्म में 15 गाने कौन झेलेगा? (9 तो संगीतकार हैं) यह भी सस्पेंस हैं कि इस फिल्म में आखिर पैसा किसने लगाया होगा? राजीव झवेरी इसके पहले ढूंढते रह जाओगे का निर्देशन कर चुके हैं, जो इस फिल्म में दर्शकों के लिए कहा जा सकता है। कुछ तो है फिल्म भी उन्हीं की थी, इस फिल्म के बारे में तो यह भी नहीं कहा जा सकता। इतनी धीमी गति, इतनी भूलभुलैया, एक हीरो पर तीन-तीन हीरोइनें, स्विटजरलैंड की शानदार वादियां और ऐसी फिल्म! तौबा-तौबा। जो लोग 150-200 रुपए के टिकिट में सवा-दो ढाई घंटे शांति से सोना चाहते है, उनके लिए यह फिल्म सुनहरा अवसर है।

ढिशुम फिल्म अच्छी नहीं है, तो बुरी भी नहीं है। बे सिर-पैर का मनोरंजन है। फूहड़ता नहीं है। कलाकारों की भरमार है, लेकिन फिल्म में अगर आपको स्वस्थ मनोरंजन मिल जाए, तो मानिए न्यूटन को ग्रेविटी का सिद्धांत, मोगली को कपड़े, और पीके को उसका खोया हुआ रिमोट मिल गया। इस फिल्म में पूरी कहानी जॉन अब्राहम के आसपास घूमती है। वरूण धवन इसके दूसरे प्रमुख कलाकार हैं। जैकलिन फर्नांडीस खानापूरी के लिए है और अक्षय कुमार, अक्षय खन्ना, राहुल देव, नरगिस फाखरी, परिणीति चोपड़ा, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, साबिक सलीम आदि-आदि तो है ही मोहिन्दर अमरनाथ, रमीज राजा और आकाश चोपड़ा भी अतिथि भूमिका में हैं। कभी लगता है कि आप धूम फिल्म देख रहे हैं, कभी लगता है कि ओम शांति ओम का कोई सीन फिल्म में आ गया हो।

जिन लोगों ने कबाली देखने के लिए छुट्टी ली होगी या जिन्हें छुट्टी मिली होगी, समझो, उनका दिन बेकार गया। अपराध और अपराधी का ऐसा महिमामंडन न तो झेलनीय है और न सराहनीय। रजनीकांत के भक्त सचमुच में बावले ही है, वरना ऐसी कोई खास बात इस फिल्म में है नहीं कि फिल्म की तारीफ की जाए। देखते है कि मार्केटिंग और विज्ञापन के भरोसे यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितनी हिट हो पाती है।

सुल्तान को ‘स्पोर्ट्स ड्रामा’ फिल्म कहा गया है, पर यह पहलवान युवक और पहलवान युवती की रोमांटिक कहानी है। यशराज की रोमांटिक पैसा वसूल फिल्म। इस फिल्म में तीन हीरो हैं सलमान, अनुष्का और फिल्म की कहानी। सलमान और अनुष्का दोनों ने ही शानदार अभिनय किया है। फिल्म की शुरुआत प्रो-टैक डाउन मुकाबले की रिपोर्टिंग करती आजतक की एंकर रिपोर्टर अंजना ओम कश्यप से होती है और बाद में फिल्म फ्लैशबैक में चली जाती है। ईद पर परिवार के साथ देखी जा सकने वाली इस फिल्म के पाकिस्तान में अगले पांच दिनों के लिए सभी शो हाउसफुल है। चर्चा है कि यह फिल्म बजरंगी भाईजान का रिकॉर्ड तोड़ सकती है। इंटरनेट पर यह फिल्म लीक हो चुकी है और विदेश में इसे धड़ल्ले से डाउनलोड करके देखा जा रहा है।

फिल्म शुरू होने के पहले सिनेमा के पर्दे पर लिखा हुआ आता है- इस फिल्म के निर्माण के दौरान किसी भी जानवर के प्रति क्रूरता नहीं बरती गई है। लिखा हुआ आना था- इस फिल्म को देखने के दौरान केवल दर्शकों के साथ ही क्रूरता बरती गई, जिसका हमें कोई अफसोस नहीं है। जिन लोगों को इस सीरिज की पहली फिल्में पसंद आई थी, वे इसे भी पसंद करेंगे। दोहरे अर्थ वाले फूहड़ संवादों और अदाओं की इस फिल्म में भरमार है। ऐसे लतीफे आमतौर पर बिगड़ैल बच्चे वाट्सएप पर पढ़ना पसंद करते है।

फिल्म शोरगुल देखने के लिए सिनेमाघर जाने की जरूरत नहीं है। ऐसा कुछ भी उल्लेखनीय इसमें नहीं है कि टिकट खरीदकर फिल्म देखने जाया जाए। उड़ता पंजाब आगामी पंजाब चुनावों के कारण विवादों में रही, तो शोरगुल उत्तरप्रदेश की राजनीति को लेकर चर्चा में आई। शोरगुल में हिन्दू, मुस्लिम, मस्जिद, मौलवी, बजरंग दल जैसे समूह, प्यार-मोहब्बत, चुनाव, ग्रामीण राजनीति, धार्मिक कट्टरता और उदारता, धूर्त राजनीतिज्ञ, ईमानदार और अवसरवादी दोनों तरह के पुलिस अधिकारी, गोकशीं, भूमि अधिग्रहण, मंदिर निर्माण, गोधरा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मलिहाबाद आदि सभी कुछ है। युवा चीफ मिनिस्टर का नाम मिथिलेश है और गृह मंत्री का नाम आलम खान। युवा नेता ओम की भूमिका में जिमी शेरगिल यूपी के प्रमुख नेता और कत्लखानों के मालिक संगीत सिंह सोम लगते है।