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बार-बार देखो की कहानी अकल्पनीय तरीके से आगे बढ़ती है। दर्शक जो अनुमान लगाता है, वैसा कुछ नहीं होता और दर्शकों के सारे गणित फेल हो जाते हैं। फिल्म कहती है कि जिंदगी गणित नहीं कि हर बार दो और दो का जोड़ चार ही हो। वैसे भी गणित क्लास रूम और बैंक में ही अच्छा लगता है। असल जिंदगी में बैलेंस बहुत जरूरी है और बैलेंस के बिना तो गणित में भी कोई इक्वेशन परफेक्ट नहीं होती। महानगरीय मेच्योर दर्शकों के लिए है यह फिल्म। एक बार तो इसे देख सकते है।
'अकीरा' फिल्म में हीरो है सोनाक्षी सिन्हा। दबंग गर्ल सोनाक्षी सिन्हा अब जाकर वास्तव में दबंग बनी है, वरना अब तक तो शो-पीस ही थी। गुंडों की हड्डियां और अपनी परम्परागत छवि दोनों तोड़ दी है इसमें। यह फिल्म सोनाक्षी को एक्शन में दिखाने के लिए लिखी गई है। ठीक भी है -- बेचारी कब तक दबंग, राउडी राठौर, ऑल इज वेल, सन ऑफ़ सरदार टाइप फिल्मों में अपनी भकुआई दिखाती ? अक्षय को लेकर 'हॉलीडे ' और आमिर को लेकर ग़ज़नी बनानेवाले दक्षिण भारत के निर्देशक एआर मुरूगो दास ने इसमें सोनाक्षी को 'एक्शन कुमारी' बना दिया ।

ए फ्लाइंग जट्ट की कहानी का आइडिया हॉलीवुड और बॉलीवुड की भी फिल्मों से मारा हुआ है। टेक्निक भी इम्पोर्ट की हुई है। हीरोइन श्रीलंका से आयातित जैकलिन फर्नांडीस और विलेन ऑस्ट्रेलिया से आयातित नाथन जोन्स हैं। बेहतर होता है कि इसके निर्माता-निर्देशक दर्शक भी इम्पोर्ट कर लेते, क्योंकि यह फिल्म नकल की भी नकल है और इसे झेल पाना आम दर्शकों के बस की बात नहीं है। फिल्म में हीरो टाइगर श्राफ का एक डायलॉग है- ‘‘हां, मैं सरदार हूं और मेरे बारह बज चुके हैं’’। इस फिल्म में बताया गया है कि सरदारों के बारह बजने का क्या मतलब होता है।
रूस्तम की खूबी यह है की ढाई घंटे की यह फ़िल्म दर्शक को कुर्सी पर बैठे रहने को बाध्य कर देती है। 1959 में मुम्बई में हुए नानावटी हत्याकांड से प्रेरित इस फ़िल्म में हत्याकांड के बाद सेना के स्कैम, न्याय व्यवस्था, अखबार की तरफ से हत्यारे के पक्ष में जनमत बनाने की कोशिश, हत्यारे और जिसकी हत्या हुई, उसे उसकी जाति और धर्म देखकर माहौल बनाने की कोशिश की रोचक प्रस्तुति है।

मजेदार फिल्म है हैप्पी भाग जाएगी। फुल टू कॉमेडी, ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं, दिलचस्प पास टाइम। यह बात और है कि हर चीज की अति कर दी गई है। ओवर एक्टिंग, ओवर कॉमेडी और कल्पना से परे घटनाक्रम। यूं भी शादी-ब्याह को लेकर बनी फिल्में चल ही जाती है। हैप्पी भी भाग जाएगी। 1993 में बनी हम हैं राही प्यार के में हीरोइन जूही चावला भी शादी के एन मौके पर भाग जाती है और फिर दिलचस्प कहानी आगे बढ़ती है।

मोहेंजो दारो देखनीय फ़िल्म है। इसकी शुरुआत के सीन जबलपुर के पास भेड़ाघाट में फिल्माये गये हैं, जिनमे ऋतिक को नदी में बड़े से मगरमच्छ का शिकार करते दिखाया गया है। भेड़ाघाट पर्दे पर आते ही जबलपुरी दर्शक झूम उठते हैं। सिंधु घाटी की यह असली लोकेशन अब पाकिस्तान में है।